Couplets Poetry (page 227)

तुम से मिल कर देर तलक

नीरज गोस्वामी

सोचता हूँ ये सोच कर मैं उसे

नीरज गोस्वामी

मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिए

नीरज गोस्वामी

मुझे रास वीरानियाँ आ गई हैं

नीरज गोस्वामी

है जिन के बाज़ुओं में दम वो दरिया पार कर लेंगे

नीरज गोस्वामी

घुटन तड़पन उदासी अश्क रुस्वाई अकेला-पन

नीरज गोस्वामी

गर न समझा तो 'नीरज' लगेगी कठिन

नीरज गोस्वामी

डाल दीं भूके को जिस में रोटियाँ

नीरज गोस्वामी

अजब ये दौर आया है कि जिस में

नीरज गोस्वामी

ज़ख़्म भी अब हसीन लगते हैं

नीना सहर

तिरे वजूद को छू ले तो फिर मुकम्मल हो

नीना सहर

मिरी प्यास का तराना यूँ समझ न आ सकेगा

नीना सहर

मारो पत्थर भी तो नहीं हिलता

नीना सहर

कल तिरे एहसास की बारिश तले

नीना सहर

कैसे होती है शब की सहर देखते

नीना सहर

हसरत-ए-मौसम-ए-गुलाब हूँ मैं

नीना सहर

कोई तो आए ख़िज़ाँ में पत्ते उगाने वाला

नीलमा सरवर

औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है

नीलमा सरवर

ज़िंदगी से मिले हुए हो तुम

नील अहमद

यूँ तो मोहब्बतों में बड़ी क़ुर्बतें रहीं

नील अहमद

ये मुख़्तसर सी शिकन क्या बताएगी तुम को

नील अहमद

तुम को खोया था एक लग़्ज़िश में

नील अहमद

सुकूत-ए-शहर-ए-दिल की बेबसी को भी कोई समझे

नील अहमद

सीने से दिल निकाल के हाथों पे रख दिया

नील अहमद

सीने से दिल निकाल के हाथों पे रख दिया

नील अहमद

सारे जज़्बे तिरी चाहत के दिखाई देते

नील अहमद

क़ैद कर लो मुझे ख़यालों में

नील अहमद

फूलों की ज़द में आ के कहीं जान से न जाए

नील अहमद

मिरे सीने से लग कर देर तक रोती है तन्हाई

नील अहमद

मैं जल गई हूँ धूप की किरनों से जा-ब-जा

नील अहमद