Couplets Poetry (page 355)
हम इस ख़ातिर तिरी तस्वीर का हिस्सा नहीं थे
हम्माद नियाज़ी
हम ऐसे लोग जो आइंदा ओ गुज़िश्ता हैं
हम्माद नियाज़ी
हार दिया है उजलत में
हम्माद नियाज़ी
दिल के सूने सेहन में गूँजी आहट किस के पाँव की
हम्माद नियाज़ी
दिखाई देने लगी थी ख़ुशबू
हम्माद नियाज़ी
भरवा देना मिरे कासे को
हम्माद नियाज़ी
बस एक लम्हा तिरे वस्ल का मयस्सर हो
हम्माद नियाज़ी
आँख बीनाई गँवा बैठी तो
हम्माद नियाज़ी
आख़िरी बार मैं कब उस से मिला याद नहीं
हम्माद नियाज़ी
तिरे गीतों का मतलब और है कुछ
हमीदा शाहीन
सितारा है कोई गुल है कि दिल है
हमीदा शाहीन
कौन बदन से आगे देखे औरत को
हमीदा शाहीन
फ़ज़ा यूँही तो नहीं मल्गजी हुई जाती
हमीदा शाहीन
तुम्हारा नक़्श इन आँखों से धुलता भी तो कैसे
हामिद ज़हूर
मैं ने भेजी थी गुलाबों की बशारत उस को
हामिद सरोश
कितने ग़म हैं जो सर-ए-शाम सुलग उठते हैं
हामिद सरोश
बे-वजह भी देखा है परेशाँ तुम्हें 'हामिद'
हामिद सलीम
ये जफ़ाओं की सज़ा है कि तमाशाई है तू
हामिद मुख़्तार हामिद
ये बुज़ुर्गों की रवा-दारी के पज़-मुर्दा गुलाब
हामिद मुख़्तार हामिद
उम्र ही तेरी गुज़र जाएगी उन के हल में
हामिद मुख़्तार हामिद
तू हँसी ले के मिरी आँख को आँसू दे दे
हामिद मुख़्तार हामिद
मुझ से ये प्यास का सहरा नहीं देखा जाता
हामिद मुख़्तार हामिद
मक़ाम-ए-ज़ब्त ग़म-ए-इश्क़ में वो पैदा कर
हामिद मुख़्तार हामिद
गिर न जाए तिरे मेयार से अंदाज़-ए-हुरूफ़
हामिद मुख़्तार हामिद
आज का ख़त ही उसे भेजा है कोरा लेकिन
हामिद मुख़्तार हामिद
तुम अपने ख़्वाब बचा कर रक्खो कि कल दुनिया
हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी
न याद की चुभन कोई न कोई लौ मलाल की
हमीद नसीम
क्या ख़बर मेरा सफ़र है और कितनी दूर का
हमीद नसीम
देखते देखते तेरा चेहरा और इक चेहरा बन जाता है
हमीद नसीम
आसूदगी-आमोज़ हो जब आबला-पाई
हमीद नसीम