Couplets Poetry (page 371)

जब कोई फ़ित्ना-ए-अय्याम नहीं होता है

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

इज़हार-ए-ग़म किया था ब-उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

हज़ारों तमन्नाओं के ख़ूँ से हम ने

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

हर क़दम पर है एहतिसाब-ए-अमल

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

है नवेद-ए-बहार हर लब पर

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

हाए बे-दाद-ए-मोहब्बत कि ये ईं बर्बादी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

गुलों से इतनी भी वाबस्तगी नहीं अच्छी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

फ़ैज़-ए-अय्याम-ए-बहार अहल-ए-क़फ़स क्या जानें

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

एक काबा के सनम तोड़े तो क्या

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

इक फ़स्ल-ए-गुल को ले के तही-दस्त क्या करें

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

चश्म-ए-सय्याद पे हर लहज़ा नज़र रखता है

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

बताए कौन किसी को निशान-ए-मंज़िल-ज़ीस्त

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

ब-सद अदा-ए-दिलबरी है इल्तिजा-ए-मय-कशी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

अपने दामन में एक तार नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

अब तो जो शय है मिरी नज़रों में है ना-पाएदार

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

अब बहुत दूर नहीं मंज़िल-ए-दोस्त

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

आश्ना जब तक न था उस की निगाह-ए-लुत्फ़ से

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

आप शर्मिंदा जफ़ाओं पे न हों

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

आफ़ियत की उम्मीद क्या कि अभी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

चाहते भी हैं चाहते भी नहीं

हबाब तिर्मिज़ी

फ़िक्र की दुनिया में कोलम्बस बना फिरता हूँ मैं

ग्यान चन्द

धरती और अम्बर पर दोनों क्या रानाई बाँट रहे थे

ग्यान चन्द

सद-साला दौर-ए-चर्ख़ था साग़र का एक दौर

गुस्ताख़ रामपुरी

उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है

गुलज़ार देहलवी

मीर के बाद ग़ालिब ओ इक़बाल

गुलज़ार देहलवी

जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़ब्ह होती हो

गुलज़ार देहलवी

हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा

गुलज़ार देहलवी

ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रक्खे हुए हैं

गुलज़ार बुख़ारी

रंग-ओ-बू का शौक़ आशोब-ए-हवा में ले गया

गुलज़ार बुख़ारी

कौन पस-ए-मंज़र में उजड़े पैकरों को देखता

गुलज़ार बुख़ारी