Couplets Poetry (page 370)
फ़स्ल-ए-गुल आई उठा अब्र चली सर्द हुआ
हबीब मूसवी
दिल में भरी है ख़ाक में मिलने की आरज़ू
हबीब मूसवी
दिल लिया है तो ख़ुदा के लिए कह दो साहब
हबीब मूसवी
दश्त-ओ-सहरा में हसीं फिरते हैं घबराए हुए
हबीब मूसवी
चाँदनी छुपती है तकयों के तले आँखों में ख़्वाब
हबीब मूसवी
बुतान-ए-सर्व-क़ामत की मोहब्बत में न फल पाया
हबीब मूसवी
बरहमन शैख़ को कर दे निगाह-ए-नाज़ उस बुत की
हबीब मूसवी
बहुत दिनों में वो आए हैं वस्ल की शब है
हबीब मूसवी
असल साबित है वही शरअ' का इक पर्दा है
हबीब मूसवी
इंसान की बुलंदी ओ पस्ती को देख कर
हबीब हैदराबादी
'हबीब' इस ज़िंदगी के पेच-ओ-ख़म से हम भी नालाँ हैं
हबीब हैदराबादी
आगे निकल गए थे ज़रा अपने-आप से
हबीब हैदराबादी
लू हो सबा हो या पुर्वाई सब के साथ चलो
हबीब फख़री
सब्र ऐ दिल कि ये हालत नहीं देखी जाती
हबीब अशअर देहलवी
ये महर-ओ-माह-ओ-कवाकिब की बज़्म-ए-ला-महदूद
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
या दैर है या काबा है या कू-ए-बुताँ है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
वो करम हो कि सितम एक तअल्लुक़ है ज़रूर
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
वो भला कैसे बताए कि ग़म-ए-हिज्र है क्या
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
तस्लीम है सआदत-ए-होश-ओ-ख़िरद मगर
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
तग-ओ-ताज़-ए-पैहम है मीरास-ए-आदम
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
रानाई-ए-बहार पे थे सब फ़रेफ़्ता
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
निगाह-ए-लुत्फ़ को उल्फ़त-शिआर समझे थे
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
न हो कुछ और तो वो दिल अता हो
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू न हुआ
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
मेरे लिए जीने का सहारा है अभी तक
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
मौत के ब'अद भी मरने पे न राज़ी होना
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
कितने सनम ख़ुद हम ने तराशे
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
कभी बे-कली कभी बे-दिली है अजीब इश्क़ की ज़िंदगी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
जो काम करने हैं उस में न चाहिए ताख़ीर
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
जिस के वास्ते बरसों सई-ए-राएगाँ की है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी