Couplets Poetry (page 369)

ज़बाँ पर तिरा नाम जब आ गया

हबीब मूसवी

यूँ आती हैं अब मेरे तनफ़्फ़ुस की सदाएँ

हबीब मूसवी

ये साबित है कि मुतलक़ का तअय्युन हो नहीं सकता

हबीब मूसवी

तीरा-बख़्ती की बला से यूँ निकलना चाहिए

हबीब मूसवी

थोड़ी थोड़ी राह में पी लेंगे गर कम है तो क्या

हबीब मूसवी

तेज़ी-ए-बादा कुजा तल्ख़ी-ए-गुफ़्तार कुजा

हबीब मूसवी

तेरा कूचा है वो ऐ बुत कि हज़ारों ज़ाहिद

हबीब मूसवी

तालिब-ए-बोसा हूँ मैं क़ासिद वो हैं ख़्वाहान-ए-जान

हबीब मूसवी

शम्अ का शाना-ए-इक़बाल है तौफ़ीक़-ए-करम

हबीब मूसवी

शब-ए-फ़ुर्क़त है ठहरते नहीं शोले दिल में

हबीब मूसवी

रिंदों को वाज़ पंद न कर फ़स्ल-ए-गुल में शैख़

हबीब मूसवी

क़दमों पे डर के रख दिया सर ताकि उठ न जाएँ

हबीब मूसवी

पिला साक़ी मय-ए-गुल-रंग फिर काली घटा आई

हबीब मूसवी

नासेह ये वा'ज़-ओ-पंद है बेकार जाएगा

हबीब मूसवी

मोहतसिब तू ने किया गर जाम-ए-सहबा पाश पाश

हबीब मूसवी

मय-कदे को जा के देख आऊँ ये हसरत दिल में है

हबीब मूसवी

मय-कदा है शैख़ साहब ये कोई मस्जिद नहीं

हबीब मूसवी

लिख कर मुक़त्तआ'त में दीं उन को अर्ज़ियाँ

हबीब मूसवी

लब-ए-जाँ-बख़्श तक जा कर रहे महरूम बोसा से

हबीब मूसवी

क्या हुआ वीराँ किया गर मोहतसिब ने मय-कदा

हबीब मूसवी

किसी सूरत से हुई कम न हमारी तशवीश

हबीब मूसवी

ख़ुदा करे कहीं मय-ख़ाने की तरफ़ न मुड़े

हबीब मूसवी

कसी हैं भब्तियाँ मस्जिद में रीश-ए-वाइज़ पर

हबीब मूसवी

करो बातें हटाओ आइना बस बन चुके गेसू

हबीब मूसवी

जो ले लेते हो यूँ हर एक का दिल बातों बातों में

हबीब मूसवी

जब कि वहदत है बाइस-ए-कसरत

हबीब मूसवी

जा सके न मस्जिद तक जम्अ' थे बहुत ज़ाहिद

हबीब मूसवी

हज़रत-ए-वाइज़ न ऐसा वक़्त हाथ आएगा फिर

हबीब मूसवी

गुलों का दौर है बुलबुल मज़े बहार में लूट

हबीब मूसवी

ग़ुर्बत बस अब तरीक़-ए-मोहब्बत को क़त्अ कर

हबीब मूसवी