Couplets Poetry (page 368)

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं

हादी मछलीशहरी

दिल-ए-सरशार मिरा चश्म-ए-सियह-मस्त तिरी

हादी मछलीशहरी

बेदर्द मुझ से शरह-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी न पूछ

हादी मछलीशहरी

अश्क-ए-ग़म उक़्दा-कुशा-ए-ख़लिश-ए-जाँ निकला

हादी मछलीशहरी

अब वो पीरी में कहाँ अहद-ए-जवानी की उमंग

हादी मछलीशहरी

अब क्यूँ गिला रहेगा मुझे हिज्र-ए-यार का

हादी मछलीशहरी

मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी

हबीब तनवीर

ख़ार को तो ज़बान-ए-गुल बख़्शी

हबीब तनवीर

ये और बात तेरी गली में न आएँ हम

हबीब जालिब

उस सितमगर की हक़ीक़त हम पे ज़ाहिर हो गई

हबीब जालिब

उन के आने के बाद भी 'जालिब'

हबीब जालिब

तुम्हें तो नाज़ बहुत दोस्तों पे था 'जालिब'

हबीब जालिब

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था

हबीब जालिब

तू आग में ऐ औरत ज़िंदा भी जली बरसों

हबीब जालिब

पा सकेंगे न उम्र भर जिस को

हबीब जालिब

न तेरी याद न दुनिया का ग़म न अपना ख़याल

हबीब जालिब

लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी

हबीब जालिब

लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना

हबीब जालिब

कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ

हबीब जालिब

कुछ और भी हैं काम हमें ऐ ग़म-ए-जानाँ

हबीब जालिब

जिन की यादों से रौशन हैं मेरी आँखें

हबीब जालिब

जिन की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिन के लिए बदनाम हुए

हबीब जालिब

इक उम्र सुनाएँ तो हिकायत न हो पूरी

हबीब जालिब

इक तिरी याद से इक तेरे तसव्वुर से हमें

हबीब जालिब

एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं

हबीब जालिब

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है

हबीब जालिब

दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें

हबीब जालिब

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं

हबीब जालिब

छोड़ इस बात को ऐ दोस्त कि तुझ से पहले

हबीब जालिब

आने वाली बरखा देखें क्या दिखलाए आँखों को

हबीब जालिब