Couplets Poetry (page 58)

कभी अपने वसाएल से न बढ़ कर ख़्वाहिशें पालो

तनवीर सिप्रा

जो कर रहा है दूसरों के ज़ेहन का इलाज

तनवीर सिप्रा

हम हिज़्ब-ए-इख़्तिलाफ़ में भी मोहतरम हुए

तनवीर सिप्रा

दिहात के वजूद को क़स्बा निगल गया

तनवीर सिप्रा

औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना

तनवीर सिप्रा

ऐ रात मुझे माँ की तरह गोद में ले ले

तनवीर सिप्रा

अब तक मिरे आ'साब पे मेहनत है मुसल्लत

तनवीर सिप्रा

आज इतना जलाओ कि पिघल जाए मिरा जिस्म

तनवीर सिप्रा

आज भी 'सिपरा' उस की ख़ुश्बू मिल मालिक ले जाता है

तनवीर सिप्रा

क्यूँ न 'तनवीर' फिर इज़हार की जुरअत कीजे

तनवीर सामानी

घरों में क़ैद हैं बस्ती के शोरफ़ा

तनवीर सामानी

फ़िक्र की आँच में पिघले तो ये मालूम हुआ

तनवीर सामानी

फ़र्ज़ी क़िस्सों झूटी बातों से अक्सर

तनवीर सामानी

अपनी सूरत भी कब अपनी लगती है

तनवीर सामानी

अपने काँधे पे लिए फिरती है एहसास का बोझ

तनवीर सामानी

रिदा-ए-संग ओढ़ कर न सो गया हो काँच भी

तनवीर मोनिस

कई लोग मोरचा-बंद ख़ौफ़ की रेत में हैं करम करम

तनवीर मोनिस

टूटी है ये कश्ती तो मिरे साथ सफ़र को

तनवीर अंजुम

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

मुझे अज़ीज़ है बे-एहतियाती-ए-सादा

तनवीर अंजुम

लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखना

तनवीर अंजुम

इस ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे मुझे नाज़ बहुत है

तनवीर अंजुम

ग़म-ए-ज़माना जब न हो ग़म-ए-वजूद ढूँड लूँ

तनवीर अंजुम

फ़रेब-ए-क़ुर्ब-ए-यार हो कि हसरत-ए-सुपुर्दगी

तनवीर अंजुम

दूर तक ये रास्ते ख़ामोश हैं

तनवीर अंजुम

दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत

तनवीर अंजुम

वो दाएरों से जो बाहर न आ सके 'तनवीर'

तनवीर अहमद अल्वी

तेरी यादों की कहानी तो नहीं है 'तनवीर'

तनवीर अहमद अल्वी

रिवायतों को सलीबों से कर दिया आज़ाद

तनवीर अहमद अल्वी

पलक झपकने में कुछ ख़्वाब टूट जाते हैं

तनवीर अहमद अल्वी