Couplets Poetry (page 60)
ग़म-ए-मोहब्बत में दिल के दाग़ों से रू-कश-ए-लाला-ज़ार हूँ मैं
ताजवर नजीबाबादी
दिल के पर्दों में छुपाया है तिरे इश्क़ का राज़
ताजवर नजीबाबादी
बर्दाश्त दर्द-ए-इश्क़ की दुश्वार हो गई
ताजवर नजीबाबादी
आह उस की बे-कसी तू न जिस के साथ हो
ताजवर नजीबाबादी
ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब
ताजदार आदिल
वो जो दरिया के बीच रहता है
ताजदार आदिल
वो इस कमाल से खेला था इश्क़ की बाज़ी
ताजदार आदिल
तुम्हारी याद बढ़ी और दिल हुआ रौशन
ताजदार आदिल
मिला था हिज्र के रस्ते में सुब्ह की मानिंद
ताजदार आदिल
मेरी आँखों में ख़्वाब हैं जिस के
ताजदार आदिल
हर मुसाफ़िर के साथ आता है
ताजदार आदिल
दुनिया-भर में जितने मंज़र अच्छे हैं
ताजदार आदिल
पत्ता पत्ता शाख़ से टूटे दरवाज़ों पे वहशत सी
ताज सईद
मसअला ये भी तो है इस अहद का ऐ जान-ए-जाँ
ताज सईद
मैं ने ज़ुल्मत के फ़ुसूँ से भागना चाहा मगर
ताज सईद
किस ने आ कर हम को दी आवाज़ पिछली रात में
ताज सईद
ज़िंदगी जंग है आसाब की और ये भी सुनो
तैमूर हसन
ज़िंदगी भर की रियाज़त मिरी बे-कार गई
तैमूर हसन
ये जंग जीत है किस की ये हार किस की है
तैमूर हसन
उतार लफ़्ज़ों का इक ज़ख़ीरा ग़ज़ल को ताज़ा ख़याल दे दे
तैमूर हसन
तुझे मैं अपना नहीं समझता इसी लिए तो
तैमूर हसन
सूरज के उस जानिब बसने वाले लोग
तैमूर हसन
सफ़र में होती है पहचान कौन कैसा है
तैमूर हसन
फिर जो करने लगा है तू व'अदा
तैमूर हसन
मिरी तवज्जोह फ़क़त मिरे काम पर रहेगी
तैमूर हसन
मकाँ से होगा कभी ला-मकान से होगा
तैमूर हसन
मैं ने बख़्श दी तिरी क्यूँ ख़ता तुझे इल्म है
तैमूर हसन
ख़ुशी ज़रूर थी 'तैमूर' दिन निकलने की
तैमूर हसन
हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं
तैमूर हसन
ये एक बात समझने में रात हो गई है
तहज़ीब हाफ़ी