Couplets Poetry (page 62)
शहर की इस भीड़ में चल तो रहा हूँ
ताहिर अज़ीम
रहता है ज़ेहन ओ दिल में जो एहसास की तरह
ताहिर अज़ीम
मुझ को भी हक़ है ज़िंदगानी का
ताहिर अज़ीम
मैं तिरे हिज्र में जो ज़िंदा हूँ
ताहिर अज़ीम
मैं तिरे हिज्र की गिरफ़्त में हूँ
ताहिर अज़ीम
जो तिरे इंतिज़ार में गुज़रे
ताहिर अज़ीम
जो बहुत बे-क़रार रखते थे
ताहिर अज़ीम
इन बातों पर मत जाना जो आम हुईं
ताहिर अज़ीम
बरसों पहले जिस दरिया में उतरा था
ताहिर अज़ीम
उसे भी पर्दा-ए-तहज़ीब को गिराना है
ताहिर अदीम
रंग क्या अजब दिया मेरी बेवफ़ाई को
ताहिर अदीम
नहीं है रहना उसे भी बहार में 'ताहिर'
ताहिर अदीम
मुझे वो छोड़ कर जब से गया है इंतिहा है
ताहिर अदीम
हर एक रस्ता-ए-पायाब से निकलना है
ताहिर अदीम
फ़क़त तुम ही नहीं नाराज़ मुझ से जान-ए-जानाँ
ताहिर अदीम
क्या शय है खींच लेती है शब को सर-ए-फ़लक
तफ़ज़ील अहमद
फ़ुरात-ए-चश्म पे है कर्बला की तुग़्यानी
तफ़ज़ील अहमद
ज़िंदा हूँ कि मरना मिरी क़िस्मत में लिखा है
ताबिश सिद्दीक़ी
ये हाल मिरा मेरी मोहब्बत का सिला है
ताबिश सिद्दीक़ी
ये माना वो शजर सूखा बहुत है
ताबिश मेहदी
तकोगे राह सहारों की तुम मियाँ कब तक
ताबिश मेहदी
पड़ोसी के मकाँ में छत नहीं है
ताबिश मेहदी
मिरे ऐबों को गिनवाया तो सब ने
ताबिश मेहदी
हम को ख़बर है शहर में उस के संग-ए-मलामत मिलते हैं
ताबिश मेहदी
फ़रिश्तों में भी जिस के तज़्किरे हैं
ताबिश मेहदी
देर तक मिल के रोते रहे राह में
ताबिश मेहदी
अजनबी रास्तों पर भटकते रहे
ताबिश मेहदी
अगर फूलों की ख़्वाहिश है तो सुन लो
ताबिश मेहदी
तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ
ताबिश कानपुरी
इश्क़ ईमान दोनों में तफ़रीक़ है
ताबिश कानपुरी