Couplets Poetry (page 250)

तुझे देखा तिरे जल्वों को देखा

नादिर शाहजहाँ पुरी

रहमत-ए-हक़ को न कर मायूस अपने फ़ेअ'ल से

नादिर शाहजहाँ पुरी

फूल खुलते ही तितली भी आई

नादिर शाहजहाँ पुरी

पत्थरों पे नाम लिखता हूँ तिरा

नादिर शाहजहाँ पुरी

नंग है राज़-ए-मोहब्बत का नुमायाँ होना

नादिर शाहजहाँ पुरी

मतलब का ज़माना है 'नादिर' कोई क्या देगा

नादिर शाहजहाँ पुरी

किसी से फिर मैं क्या उम्मीद रक्खूँ

नादिर शाहजहाँ पुरी

जो भी दे दे वो करम से वही ले ले 'नादिर'

नादिर शाहजहाँ पुरी

जल बुझूँगा भड़क के दम भर में

नादिर शाहजहाँ पुरी

इंसान के दिल को ही कोई साज़ नहीं है

नादिर शाहजहाँ पुरी

भरे रहते हैं अश्क आँखों में हर दम

नादिर शाहजहाँ पुरी

बा'द मरने के भी अरमान यही है ऐ दोस्त

नादिर शाहजहाँ पुरी

तिरी तारीफ़ हो ऐ साहिब-ए-औसाफ़ क्या मुमकिन

नादिर लखनवी

फिर न बाक़ी रहे ग़ुबार कभी

नादिर लखनवी

नाव काग़ज़ की तन-ए-ख़ाकी-ए-इंसाँ समझो

नादिर लखनवी

न ख़ंजर उठेगा न तलवार इन से

नादिर लखनवी

हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ

नादिर लखनवी

हैं दीन के पाबंद न दुनिया के मुक़य्यद

नादिर लखनवी

दरिया-ए-शराब उस ने बहाया है हमेशा

नादिर लखनवी

क्या शिकायत जो कट गए गाहक

नादिर काकोरवी

इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले

नादिम नदीम

उम्र भर रहना है ताबीर से गर दूर तुम्हें

नदीम गुल्लानी

तुम्हें हमारी मोहब्बतों के हसीन जज़्बे बुला रहे हैं

नदीम गुल्लानी

तुझ से मैं जंग का एलान भी कर ही दूँगा

नदीम गुल्लानी

तू समझता है गर फ़ुज़ूल मुझे

नदीम गुल्लानी

तमाम उम्र तिरे इंतिज़ार में हमदम

नदीम गुल्लानी

नहीं है जिस का हल अब तो कोई 'नदीम' बस इक सिवा तुम्हारे

नदीम गुल्लानी

दुनिया बदल गई थी कोई ग़म न था मुझे

नदीम गुल्लानी

तू पानियों में ज़रा ऐसे हाथ पाँव न मार

नदीम गोयाई

किधर को जाऊँ हवाओं की क़ैद से छुट कर

नदीम गोयाई