Couplets Poetry (page 38)

तिरी नज़र से दिलों के चराग़ जल उठ्ठे

वाक़िफ़ राय बरेलवी

वक़्त के साथ साथ चलना तुम

वक़ास बलूच

बुला रहे हो हमें भी मगर ख़याल रहे

वक़ार वासिक़ी

'वक़ार' ऐ काश मेरी उम्र में शामिल न की जाए

वक़ार मानवी

सलीक़ा बोलने का हो तो बोलो

वक़ार मानवी

मैं ज़िंदगी को लिए फिर रहा हूँ कब से 'वक़ार'

वक़ार मानवी

ख़ुशी दामन-कशाँ है दिल असीर-ए-ग़म है बरसों से

वक़ार मानवी

कहाँ मिलेगी भला इस सितमगरी की मिसाल

वक़ार मानवी

इन आँसुओं से भला मेरा क्या भला होगा

वक़ार मानवी

हर ग़म सहना और ख़ुश रहना

वक़ार मानवी

हमारी ज़िंदगी कहने की हद तक ज़िंदगी है बस

वक़ार मानवी

ग़रीब को हवस-ए-ज़िंदगी नहीं होती

वक़ार मानवी

दिल में जो मर जाए वो है अरमाँ

वक़ार मानवी

बहुत से ग़म छुपे होंगे हँसी में

वक़ार मानवी

अब के 'वक़ार' ऐसे बिछड़े हैं

वक़ार मानवी

ज़बाँ तक जो न आए वो मोहब्बत और होती है

वामिक़ जौनपुरी

ये ज़िंदगी की रात है तारीक किस क़दर

वामिक़ जौनपुरी

ये माना शीशा-ए-दिल रौनक़-ए-बाज़ार-ए-उल्फ़त है

वामिक़ जौनपुरी

ये हम को छोड़ के तन्हा कहाँ चले 'वामिक़'

वामिक़ जौनपुरी

यक़ीनन आ गया है मय-कदे में तिश्ना-लब कोई

वामिक़ जौनपुरी

वो वादे याद नहीं तिश्ना है मगर अब तक

वामिक़ जौनपुरी

वो तो कहिए आज भी ज़ंजीर में झंकार है

वामिक़ जौनपुरी

वो लम्हा भर की मिली ख़ुल्द में जो आज़ादी

वामिक़ जौनपुरी

वो जो तस्बीह लिए है उस को

वामिक़ जौनपुरी

उसे ज़िद कि 'वामिक़'-ए-शिकवा-गर किसी राज़ से न हो बा-ख़बर

वामिक़ जौनपुरी

तुम होश में जब आए तो आफ़त ही बन के आए

वामिक़ जौनपुरी

तेरी क़िस्मत ही में ज़ाहिद मय नहीं

वामिक़ जौनपुरी

सरकशी ख़ुद-कशी पे ख़त्म हुई

वामिक़ जौनपुरी

रहना तुम चाहे जहाँ ख़बरों में आते रहना

वामिक़ जौनपुरी

रात भी मुरझा चली चाँद भी कुम्हला गया

वामिक़ जौनपुरी