Couplets Poetry (page 39)
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी
वामिक़ जौनपुरी
पहचान लो उस को वही क़ातिल है हमारा
वामिक़ जौनपुरी
नहीं मिलते तो इक अदना शिकायत है न मिलने की
वामिक़ जौनपुरी
न पूछो बेबसी उस तिश्ना-लब की
वामिक़ जौनपुरी
मुझे उस जुनूँ की है जुस्तुजू जो चमन को बख़्श दे रंग ओ बू
वामिक़ जौनपुरी
मोहब्बत की सज़ा तर्क-ए-मोहब्बत
वामिक़ जौनपुरी
मिरे फ़िक्र ओ फ़न को नई फ़ज़ा नए बाल-ओ-पर की तलाश है
वामिक़ जौनपुरी
मैं तंग हूँ सुकून से अब इज़्तिराब दे
वामिक़ जौनपुरी
ले के तेशा उठा है फिर मज़दूर
वामिक़ जौनपुरी
लाख आबाद-ए-तमन्ना हो के दिल
वामिक़ जौनपुरी
किस ने बसाया था और उन को किस ने यूँ बर्बाद किया
वामिक़ जौनपुरी
कौन सुनता है भिकारी की सदाएँ इस लिए
वामिक़ जौनपुरी
जब पुराना लहजा खो देता है अपनी ताज़गी
वामिक़ जौनपुरी
इस दौर की तख़्लीक़ भी क्या शीशागरी है
वामिक़ जौनपुरी
हम न कहते थे शाइरी है वबाल
वामिक़ जौनपुरी
हम को हाजत नहीं नक़ीबों की
वामिक़ जौनपुरी
है जिस की ठोकरों में आब-ए-ज़ि़ंदगी 'वामिक़'
वामिक़ जौनपुरी
हारने जीतने से कुछ नहीं होता 'वामिक़'
वामिक़ जौनपुरी
इक हल्क़ा-ए-अहबाब है तन्हाई भी उस की
वामिक़ जौनपुरी
देखिए कब राह पर ठीक से उट्ठें क़दम
वामिक़ जौनपुरी
बदलती रहती हैं क़द्रें रहील-ए-वक़्त के साथ
वामिक़ जौनपुरी
अरे ओ अदीब-ए-फ़सुर्दा-ख़ू अरे ओ मुग़न्नी-ए-रंग ओ बू
वामिक़ जौनपुरी
ऐ काश मिरे गोश ओ नज़र भी रहें साबित
वामिक़ जौनपुरी
अगर ग़ुबार हो दिल में अगर हो तंग-नज़र
वामिक़ जौनपुरी
ज़ाहिदा तू सोहबत-ए-रिंदाँ में आया है तो सुन
वलीउल्लाह मुहिब
ये जूँ जूँ वा'दे के दिन रात पड़ते जाते हैं
वलीउल्लाह मुहिब
ये दाढ़ी मोहतसिब ने दुख़्त-ए-रज़ के फाड़ खाने को
वलीउल्लाह मुहिब
ये बंदा हो या तुम हो वाँ ग़ैर न हो कोई
वलीउल्लाह मुहिब
वो जो लैला है मिरे दिल में सुने उस का जो शोर
वलीउल्लाह मुहिब
उस के कूचे ही में आ निकलूँ हूँ जाऊँ जिस तरफ़
वलीउल्लाह मुहिब