Couplets Poetry (page 36)

वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से

वसीम बरेलवी

वो ग़म अता किया दिल-ए-दीवाना जल गया

वसीम बरेलवी

वो दिन गए कि मोहब्बत थी जान की बाज़ी

वसीम बरेलवी

'वसीम' देखना मुड़ मुड़ के वो उसी की तरफ़

वसीम बरेलवी

वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए

वसीम बरेलवी

उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में

वसीम बरेलवी

उन से कह दो मुझे ख़ामोश ही रहने दे 'वसीम'

वसीम बरेलवी

तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ

वसीम बरेलवी

तुम आ गए हो तो कुछ चाँदनी सी बातें हों

वसीम बरेलवी

तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूँ मैं

वसीम बरेलवी

तिरे ख़याल के हाथों कुछ ऐसा बिखरा हूँ

वसीम बरेलवी

तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकता

वसीम बरेलवी

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ

वसीम बरेलवी

शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं

वसीम बरेलवी

सभी रिश्ते गुलाबों की तरह ख़ुशबू नहीं देते

वसीम बरेलवी

रख देता है ला ला के मुक़ाबिल नए सूरज

वसीम बरेलवी

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी

वसीम बरेलवी

फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं

वसीम बरेलवी

न पाने से किसी के है न कुछ खोने से मतलब है

वसीम बरेलवी

मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत है

वसीम बरेलवी

मुझे पढ़ता कोई तो कैसे पढ़ता

वसीम बरेलवी

मोहब्बत में बिछड़ने का हुनर सब को नहीं आता

वसीम बरेलवी

मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें

वसीम बरेलवी

मैं ने चाहा है तुझे आम से इंसाँ की तरह

वसीम बरेलवी

मैं उस को पूज तो सकता हूँ छू नहीं सकता

वसीम बरेलवी

मैं उस को आँसुओं से लिख रहा हूँ

वसीम बरेलवी

मैं जिन दिनों तिरे बारे में सोचता हूँ बहुत

वसीम बरेलवी

मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश

वसीम बरेलवी

मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पाया

वसीम बरेलवी

लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता

वसीम बरेलवी