Couplets Poetry (page 410)

इतनी पी जाए कि मिट जाए मैं और तू की तमीज़

फ़रहत शहज़ाद

हम से तंहाई के मारे नहीं देखे जाते

फ़रहत शहज़ाद

हर्फ़ जैसे हो गए सारे मुनाफ़िक़ एक दम

फ़रहत शहज़ाद

देख के जिस को दिल दुखता था

फ़रहत शहज़ाद

बात अपनी अना की है वर्ना

फ़रहत शहज़ाद

अज़ीज़ मुझ को हैं तूफ़ान साहिलों से सिवा

फ़रहत शहज़ाद

ये क्यूँ कहते हो राह-ए-इश्क़ पर चलना है हम को

फ़रहत नदीम हुमायूँ

तिरा दीदार हो आँखें किसी भी सम्त देखें

फ़रहत नदीम हुमायूँ

नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मिलना है अगर ख़ुद से तो फिर देर न करना

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मेरा हर ख़्वाब तो बस ख़्वाब ही जैसा निकला

फ़रहत नदीम हुमायूँ

दिल ऐसा मकाँ है जो अगर टूट गया तो

फ़रहत नदीम हुमायूँ

ढूँडेंगे हर इक चीज़ में जीने की उमंगें

फ़रहत नदीम हुमायूँ

हस्ती का राज़ क्या है ग़म-ए-हस्त-ओ-बूद है

फ़रहत कानपुरी

'फ़रहत' तिरे नग़मों की वो शोहरत है जहाँ में

फ़रहत कानपुरी

दुनिया ने ख़ूब समझा दुनिया ने ख़ूब परखा

फ़रहत कानपुरी

दिल की राहें जुदा हैं दुनिया से

फ़रहत कानपुरी

दौलत-ए-अहद-ए-जवानी हो गए

फ़रहत कानपुरी

आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर

फ़रहत कानपुरी

ये तेरा मेरा झगड़ा है दुनिया को बीच में क्यूँ डालें

फ़रहत एहसास

ये धड़कता हुआ दिल उस के हवाले कर दूँ

फ़रहत एहसास

ये बे-कनार बदन कौन पार कर पाया

फ़रहत एहसास

वो जो इक शोर सा बरपा है अमल है मेरा

फ़रहत एहसास

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा

फ़रहत एहसास

उसे ख़बर थी कि हम विसाल और हिज्र इक साथ चाहते हैं

फ़रहत एहसास

उस से मिलने के लिए जाए तो क्या जाए कोई

फ़रहत एहसास

उस जगह जा के वो बैठा है भरी महफ़िल में

फ़रहत एहसास

तू फ़राहम न हो मुझ को ये है मर्ज़ी तेरी

फ़रहत एहसास

तिरे होंटों के सहरा में तिरी आँखों के जंगल में

फ़रहत एहसास

तमाम शहर की आँखों में रेज़ा रेज़ा हूँ

फ़रहत एहसास