Couplets Poetry (page 408)

जब कोई नौजवान मरता है

फ़ारूक़ नाज़की

हिसार-ए-ख़ौफ़-ओ-हिरास में है बुतान-ए-वहम-ओ-गुमाँ की बस्ती

फ़ारूक़ नाज़की

भटक न जाता अगर ज़ात के बयाबाँ में

फ़ारूक़ नाज़की

बहकी हुई रूहों को तसल्ली दे कर

फ़ारूक़ नाज़की

अब फ़क़ीरी में कोई बात नहीं

फ़ारूक़ नाज़की

आप की तस्वीर थी अख़बार में

फ़ारूक़ नाज़की

यक़ीं मुझे भी है वो आएँगे ज़रूर मगर

फ़ारूक़ बाँसपारी

सितारों से शब-ए-ग़म का तो दामन जगमगा उठ्ठा

फ़ारूक़ बाँसपारी

नदीम तारीख़-ए-फ़तह-ए-दानिश बस इतना लिख कर तमाम कर दे

फ़ारूक़ बाँसपारी

मिरी ज़िंदगी का महवर यही सोज़-ओ-साज़-ए-हस्ती

फ़ारूक़ बाँसपारी

मिरे नाख़ुदा न घबरा ये नज़र है अपनी अपनी

फ़ारूक़ बाँसपारी

किसी की राह में 'फ़ारूक़' बर्बाद-ए-वफ़ा हो कर

फ़ारूक़ बाँसपारी

ग़म-ए-इश्क़ ही ने काटी ग़म-ए-इश्क़ की मुसीबत

फ़ारूक़ बाँसपारी

अल्लाह के बंदों की है दुनिया ही निराली

फ़ारूक़ बाँसपारी

ज़माने अब तिरे मद्द-ए-मुक़ाबिल

फरीहा नक़वी

वो ख़ुदा है तो भला उस से शिकायत कैसी?

फरीहा नक़वी

उस की जानिब से बढ़ा एक क़दम

फरीहा नक़वी

तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में

फरीहा नक़वी

तुम्हें पाने की हैसिय्यत नहीं है

फरीहा नक़वी

तुम्हारे रंग फीके पड़ गए नाँ?

फरीहा नक़वी

तुम मिरी वहशतों के साथी थे

फरीहा नक़वी

रात से एक सोच में गुम हूँ

फरीहा नक़वी

मिरे हिज्र के फ़ैसले से डरो तुम

फरीहा नक़वी

लड़खड़ाना नहीं मुझे फिर भी

फरीहा नक़वी

किस किस फूल की शादाबी को मस्ख़ करोगे बोलो!!!

फरीहा नक़वी

खुल कर आख़िर जहल का एलान होना चाहिए

फरीहा नक़वी

हम आज क़ौस-ए-क़ुज़ह के मानिंद एक दूजे पे खिल रहे हैं

फरीहा नक़वी

हथेली से ठंडा धुआँ उठ रहा है

फरीहा नक़वी

दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बार

फरीहा नक़वी

भली क्यूँ लगे हम को ख़ुशियों की दस्तक

फरीहा नक़वी