Couplets Poetry (page 412)
इश्क़ में पीने का पानी बस आँख का पानी
फ़रहत एहसास
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
फ़रहत एहसास
हिज्र ओ विसाल चराग़ हैं दोनों तन्हाई के ताक़ों में
फ़रहत एहसास
हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है
फ़रहत एहसास
हमें जब अपना तआ'रुफ़ करना पड़ता है
फ़रहत एहसास
हमें जब अपना तआ'रुफ़ कराना पड़ता है
फ़रहत एहसास
हमारी आँखों में बस गया है अजीब पंजाब आँसुओं का
फ़रहत एहसास
हमारा ज़िंदा रहना और मरना एक जैसा है
फ़रहत एहसास
फ़रार हो गई होती कभी की रूह मिरी
फ़रहत एहसास
एक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
फ़रहत एहसास
एक बार उस ने बुलाया था तो मसरूफ़ था मैं
फ़रहत एहसास
दुनिया से कहो जो उसे करना है वो कर ले
फ़रहत एहसास
दो अलग लफ़्ज़ नहीं हिज्र ओ विसाल
फ़रहत एहसास
धूप बोली कि मैं आबाई वतन हूँ तेरा
फ़रहत एहसास
दर-अस्ल इस जहाँ को ज़रूरत नहीं मिरी
फ़रहत एहसास
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
फ़रहत एहसास
बे-बदन रूह बने फिरते रहोगे कब तक
फ़रहत एहसास
बस एक लम्स कि जल जाएँ सब ख़स-ओ-ख़ाशाक
फ़रहत एहसास
बन न पाया हीर, राँझा अब भी राँझा है बहुत
फ़रहत एहसास
बड़ा वसीअ है उस के जमाल का मंज़र
फ़रहत एहसास
बचा के लाएँ किसी भी यतीम बच्चे को
फ़रहत एहसास
औरतें काम पे निकली थीं बदन घर रख कर
फ़रहत एहसास
ऐ सदफ़ सुन तुझे फिर याद दिला देता हूँ
फ़रहत एहसास
ऐ ख़ुदा मेरी रगों में दौड़ जा
फ़रहत एहसास
अब देखता हूँ मैं तो वो अस्बाब ही नहीं
फ़रहत एहसास
आँख भर देख लो ये वीराना
फ़रहत एहसास
आँखों की प्यालियों में बारिश मची हुई है
फ़रहत एहसास
आ मुझे छू के हरा रंग बिछा दे मुझ पर
फ़रहत एहसास
उस के बारे में बहुत सोचता हूँ
फ़रहत अब्बास शाह
उसे ज़ियादा ज़रूरत थी घर बसाने की
फ़रहत अब्बास शाह