Couplets Poetry (page 414)

उसी तरफ़ है ज़माना भी आज महव-ए-सफ़र

फ़राग़ रोहवी

तुम्हारा चेहरा तुम्हें हू-ब-हू दिखाऊँगा

फ़राग़ रोहवी

सुना है अम्न-परस्तों का वो इलाक़ा है

फ़राग़ रोहवी

न जाने कैसा समुंदर है इश्क़ का जिस में

फ़राग़ रोहवी

न चाँद ने किया रौशन मुझे न सूरज ने

फ़राग़ रोहवी

मुझ में है यही ऐब कि औरों की तरह मैं

फ़राग़ रोहवी

मिरी मैली हथेली पर तो बचपन से

फ़राग़ रोहवी

किसी ने राह का पत्थर हमीं को ठहराया

फ़राग़ रोहवी

खुली न मुझ पे भी दीवानगी मिरी बरसों

फ़राग़ रोहवी

ख़ूब निभेगी हम दोनों में मेरे जैसा तू भी है

फ़राग़ रोहवी

कौन आता है अयादत के लिए देखें 'फ़राग़'

फ़राग़ रोहवी

हम से तहज़ीब का दामन नहीं छोड़ा जाता

फ़राग़ रोहवी

हमारे तन पे कोई क़ीमती क़बा न सही

फ़राग़ रोहवी

इक दिन वो मेरे ऐब गिनाने लगा 'फ़राग़'

फ़राग़ रोहवी

दिमाग़ अहल-ए-मोहब्बत का साथ देता नहीं

फ़राग़ रोहवी

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं

फ़ानी बदायुनी

ज़िक्र जब छिड़ गया क़यामत का

फ़ानी बदायुनी

ज़माना बर-सर-ए-आज़ार था मगर 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

यूँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया

फ़ानी बदायुनी

यूँ न किसी तरह कटी जब मिरी ज़िंदगी की रात

फ़ानी बदायुनी

यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए

फ़ानी बदायुनी

या-रब तिरी रहमत से मायूस नहीं 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

यारब नवा-ए-दिल से ये कान आश्ना से हैं

फ़ानी बदायुनी

या तिरे मुहताज हैं ऐ ख़ून-ए-दिल

फ़ानी बदायुनी

या कहते थे कुछ कहते जब उस ने कहा कहिए

फ़ानी बदायुनी

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में

फ़ानी बदायुनी

वो नज़र कामयाब हो के रही

फ़ानी बदायुनी

उस को भूले तो हुए हो 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

तुम्हीं कहो कि तुम्हें अपना समझ के क्या पाया

फ़ानी बदायुनी

तिनकों से खेलते ही रहे आशियाँ में हम

फ़ानी बदायुनी