Couplets Poetry (page 416)
किस ख़राबी से ज़िंदगी 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
कश्ती-ए-ए'तिबार तोड़ के देख
फ़ानी बदायुनी
करम-ए-बे-हिसाब चाहा था
फ़ानी बदायुनी
कफ़न ऐ गर्द-ए-लहद देख न मैला हो जाए
फ़ानी बदायुनी
जिस्म-ए-आज़ादी में फूंकी तू ने मजबूरी की रूह
फ़ानी बदायुनी
जीने भी नहीं देते मरने भी नहीं देते
फ़ानी बदायुनी
जवानी को बचा सकते तो हैं हर दाग़ से वाइ'ज़
फ़ानी बदायुनी
जौर को जौर भी अब क्या कहिए
फ़ानी बदायुनी
जल्वा ओ दिल में फ़र्क़ नहीं जल्वे को ही अब दिल कहते हैं
फ़ानी बदायुनी
इस दर्द का इलाज अजल के सिवा भी है
फ़ानी बदायुनी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
फ़ानी बदायुनी
हम हैं उस के ख़याल की तस्वीर
फ़ानी बदायुनी
होते हैं राज़-ए-इश्क़-ओ-मोहब्बत इसी से फ़ाश
फ़ानी बदायुनी
हिज्र में मुस्कुराए जा दिल में उसे तलाश कर
फ़ानी बदायुनी
हज़ार ढूँडिए उस का निशाँ नहीं मिलता
फ़ानी बदायुनी
हर तबस्सुम का दिया एक तबस्सुम से जवाब
फ़ानी बदायुनी
हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
फ़ानी दवा-ए-दर्द-ए-जिगर ज़हर तो नहीं
फ़ानी बदायुनी
इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
फ़ानी बदायुनी
एक आलम को देखता हूँ मैं
फ़ानी बदायुनी
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में किस का ज़ुहूर था
फ़ानी बदायुनी
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
फ़ानी बदायुनी
दिल-ए-मरहूम को ख़ुदा बख़्शे
फ़ानी बदायुनी
दिल-ए-आबाद का 'फ़ानी' कोई मफ़्हूम नहीं
फ़ानी बदायुनी
दिल सरापा दर्द था वो इब्तिदा-ए-इश्क़ थी
फ़ानी बदायुनी
दिल का उजड़ना सहल सही बसना सहल नहीं ज़ालिम
फ़ानी बदायुनी
दर्द-ए-दिल की उन्हें ख़बर क्या हो
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बीमार तिरे जी से गुज़र जाएँ तो अच्छा
फ़ानी बदायुनी
भर के साक़ी जाम-ए-मय इक और ला और जल्द ला
फ़ानी बदायुनी