Couplets Poetry (page 415)
तर्क-ए-उम्मीद बस की बात नहीं
फ़ानी बदायुनी
सूर-ओ-मंसूर-ओ-तूर अरे तौबा
फ़ानी बदायुनी
सुने जाते न थे तुम से मिरे दिन-रात के शिकवे
फ़ानी बदायुनी
सुने जाते न थे तुम से मिरे दिन रात के शिकवे
फ़ानी बदायुनी
शिकवा-ए-हिज्र पे सर काट के फ़रमाते हैं
फ़ानी बदायुनी
रूह घबराई हुई फिरती है मेरी लाश पर
फ़ानी बदायुनी
रूह अरबाब-ए-मोहब्बत की लरज़ जाती है
फ़ानी बदायुनी
रोज़-ए-जज़ा गिला तो क्या शुक्र-ए-सितम ही बन पड़ा
फ़ानी बदायुनी
रोज़ है दर्द-ए-मोहब्बत का निराला अंदाज़
फ़ानी बदायुनी
रोने के भी आदाब हुआ करते हैं 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
फिर किसी की याद ने तड़पा दिया
फ़ानी बदायुनी
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
फ़ानी बदायुनी
ना-मेहरबानियों का गिला तुम से क्या करें
फ़ानी बदायुनी
नहीं ज़रूर कि मर जाएँ जाँ-निसार तेरे
फ़ानी बदायुनी
न इंतिहा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
फ़ानी बदायुनी
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
फ़ानी बदायुनी
मुस्कुराए वो हाल-ए-दिल सुन कर
फ़ानी बदायुनी
मुझे बुला के यहाँ आप छुप गया कोई
फ़ानी बदायुनी
मुझ तक उस महफ़िल में फिर जाम-ए-शराब आने को है
फ़ानी बदायुनी
मेरी हवस को ऐश-ए-दो-आलम भी था क़ुबूल
फ़ानी बदायुनी
मेरे जुनूँ को ज़ुल्फ़ के साए से दूर रख
फ़ानी बदायुनी
मौत का इंतिज़ार बाक़ी है
फ़ानी बदायुनी
मौत आने तक न आए अब जो आए हो तो हाए
फ़ानी बदायुनी
मौजों की सियासत से मायूस न हो 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
मर के टूटा है कहीं सिलसिला-ए-क़ैद-ए-हयात
फ़ानी बदायुनी
मैं ने 'फ़ानी' डूबती देखी है नब्ज़-ए-काएनात
फ़ानी बदायुनी
क्या बला थी अदा-ए-पुर्सिश-ए-यार
फ़ानी बदायुनी
कुछ कटी हिम्मत-ए-सवाल में उम्र
फ़ानी बदायुनी
किसी को क्या मिरे सूद ओ ज़ियाँ से
फ़ानी बदायुनी
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी