Couplets Poetry (page 489)

'असलम' बड़े वक़ार से डिग्री वसूल की

असलम कोलसरी

सारे दिल एक से नहीं होते

असलम फ़र्रुख़ी

रौशनी हो रही है कुछ महसूस

असलम फ़र्रुख़ी

न देख मुझ को मोहब्बत की आँख से ऐ दोस्त

असलम फ़र्रुख़ी

कोई मंज़िल नहीं बाक़ी है मुसाफ़िर के लिए

असलम फ़र्रुख़ी

हंगामा-ए-हस्ती से गुज़र क्यूँ नहीं जाते

असलम फ़र्रुख़ी

आग सी लग रही है सीने में

असलम फ़र्रुख़ी

नफ़रत से है नफ़रत हम को प्रीत हमारी रीत

असलम फ़ैज़ी

उन्हें ये फ़िक्र कि दिल को कहाँ छुपा रक्खें

असलम इमादी

तुम्हारे दर्द से जागे तो उन की क़द्र खुली

असलम इमादी

तुम मिरे कमरे के अंदर झाँकने आए हो क्यूँ

असलम इमादी

नमी उतर गई धरती में तह-ब-तह 'असलम'

असलम इमादी

हम भी 'असलम' इसी गुमान में हैं

असलम इमादी

हज़ार रास्ते बदले हज़ार स्वाँग रचे

असलम इमादी

हवाएँ शहर की आलूदा-ए-कसाफ़त हैं

असलम इमादी

सिलसिला रोने का सदियों से चला आता है

असलम आज़ाद

रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं

असलम आज़ाद

फेंका था किस ने संग-ए-हवस रात ख़्वाब में

असलम आज़ाद

न दश्त ओ दर से अलग था न जंगलों से जुदा

असलम आज़ाद

मैं ने अपनी ख़्वाहिशों का क़त्ल ख़ुद ही कर दिया

असलम आज़ाद

कोई दीवार सलामत है न अब छत मेरी

असलम आज़ाद

किसी तरह न तिलिस्म-ए-सुकूत टूट सका

असलम आज़ाद

हज़ार बार निगाहों से चूम कर देखा

असलम आज़ाद

हमारे बीच वो चुप-चाप बैठा रहता है

असलम आज़ाद

दोस्तों के साथ दिन में बैठ कर हँसता रहा

असलम आज़ाद

धूप के बादल बरस कर जा चुके थे और मैं

असलम आज़ाद

अपना मकान भी था उसी मोड़ पर मगर

असलम आज़ाद

ज़रा सी बात पे क्या क्या फ़साना-साज़ी है

असलम अंसारी

उड़ा है रफ़्ता रफ़्ता रंग तस्वीर-ए-मोहब्बत का

असलम अंसारी

रग-ए-हर-साज़ ये कहती है कि ऐ नग़्मा-तराज़

असलम अंसारी