Couplets Poetry (page 556)

पैदा हुआ वकील तो शैतान ने कहा

अकबर इलाहाबादी

पड़ जाएँ मिरे जिस्म पे लाख आबले 'अकबर'

अकबर इलाहाबादी

नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें

अकबर इलाहाबादी

नौकरों पर जो गुज़रती है मुझे मालूम है

अकबर इलाहाबादी

मुझ को तो देख लेने से मतलब है नासेहा

अकबर इलाहाबादी

मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ

अकबर इलाहाबादी

मेरी ये बेचैनियाँ और उन का कहना नाज़ से

अकबर इलाहाबादी

मेरे हवास इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर

अकबर इलाहाबादी

मिरा मोहताज होना तो मिरी हालत से ज़ाहिर है

अकबर इलाहाबादी

मज़हबी बहस मैं ने की ही नहीं

अकबर इलाहाबादी

मरऊब हो गए हैं विलायत से शैख़-जी

अकबर इलाहाबादी

मैं हूँ क्या चीज़ जो उस तर्ज़ पे जाऊँ 'अकबर'

अकबर इलाहाबादी

मैं भी ग्रेजुएट हूँ तुम भी ग्रेजुएट

अकबर इलाहाबादी

मय भी होटल में पियो चंदा भी दो मस्जिद में

अकबर इलाहाबादी

लोग कहते हैं कि बद-नामी से बचना चाहिए

अकबर इलाहाबादी

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को

अकबर इलाहाबादी

लिपट भी जा न रुक 'अकबर' ग़ज़ब की ब्यूटी है

अकबर इलाहाबादी

लीडरों की धूम है और फॉलोवर कोई नहीं

अकबर इलाहाबादी

लगावट की अदा से उन का कहना पान हाज़िर है

अकबर इलाहाबादी

क्या वो ख़्वाहिश कि जिसे दिल भी समझता हो हक़ीर

अकबर इलाहाबादी

क्या पूछते हो 'अकबर'-ए-शोरीदा-सर का हाल

अकबर इलाहाबादी

कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी

अकबर इलाहाबादी

कुछ नहीं कार-ए-फ़लक हादसा-पाशी के सिवा

अकबर इलाहाबादी

कुछ इलाहाबाद में सामाँ नहीं बहबूद के

अकबर इलाहाबादी

किस नाज़ से कहते हैं वो झुँझला के शब-ए-वस्ल

अकबर इलाहाबादी

ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है ऐ 'अकबर'

अकबर इलाहाबादी

खींचो न कमानों को न तलवार निकालो

अकबर इलाहाबादी

ख़िलाफ़-ए-शरअ कभी शैख़ थूकता भी नहीं

अकबर इलाहाबादी

जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर

अकबर इलाहाबादी

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर

अकबर इलाहाबादी