Couplets Poetry (page 558)
धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का
अकबर इलाहाबादी
दावा बहुत बड़ा है रियाज़ी में आप को
अकबर इलाहाबादी
डाल दे जान मआ'नी में वो उर्दू ये है
अकबर इलाहाबादी
कॉलेज से आ रही है सदा पास पास की
अकबर इलाहाबादी
कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया
अकबर इलाहाबादी
बुतों के पहले बंदे थे मिसों के अब हुए ख़ादिम
अकबर इलाहाबादी
बुत-कदे में शोर है 'अकबर' मुसलमाँ हो गया
अकबर इलाहाबादी
बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करें
अकबर इलाहाबादी
बूट दासन ने बनाया मैं ने इक मज़मून लिखा
अकबर इलाहाबादी
बोले कि तुझ को दीन की इस्लाह फ़र्ज़ है
अकबर इलाहाबादी
बताऊँ आप को मरने के बाद क्या होगा
अकबर इलाहाबादी
बस जान गया मैं तिरी पहचान यही है
अकबर इलाहाबादी
बी.ए भी पास हों मिले बी-बी भी दिल-पसंद
अकबर इलाहाबादी
असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर'
अकबर इलाहाबादी
अक़्ल में जो घिर गया ला-इंतिहा क्यूँकर हुआ
अकबर इलाहाबादी
अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से
अकबर इलाहाबादी
अगर मज़हब ख़लल-अंदाज़ है मुल्की मक़ासिद में
अकबर इलाहाबादी
अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा
अकबर इलाहाबादी
आशिक़ी का हो बुरा उस ने बिगाड़े सारे काम
अकबर इलाहाबादी
आई होगी किसी को हिज्र में मौत
अकबर इलाहाबादी
आह जो दिल से निकाली जाएगी
अकबर इलाहाबादी
ज़िंदगी हम से चाहती क्या है
अजमल सिराज
ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल'
अजमल सिराज
ये जो हम खोए खोए रहते हैं
अजमल सिराज
ये भी तय है कि जो बोएँगे वो काटेंगे यहाँ
अजमल सिराज
उस ने पूछा था क्या हाल है
अजमल सिराज
ठहर गया है दिल का जाना
अजमल सिराज
रह गया दिल में इक दर्द सा
अजमल सिराज
मिरी मिसाल तो ऐसी है जैसे ख़्वाब कोई
अजमल सिराज
मैं ने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है
अजमल सिराज