Couplets Poetry (page 575)

मेरा सलाम इश्क़ अलैहिस-सलाम को

अहमद हुसैन माइल

मैं ही मोमिन मैं ही काफ़िर मैं ही काबा मैं ही दैर

अहमद हुसैन माइल

क्या आई थीं हूरें तिरे घर रात को मेहमाँ

अहमद हुसैन माइल

कुछ न पूछो ज़ाहिदों के बातिन ओ ज़ाहिर का हाल

अहमद हुसैन माइल

खोल कर ज़ुल्फ़-ए-मुसलसल को पढ़ी उस ने नमाज़

अहमद हुसैन माइल

जो उन को लिपटा के गाल चूमा हया से आने लगा पसीना

अहमद हुसैन माइल

जितने अच्छे हैं मैं हूँ उन में बुरा

अहमद हुसैन माइल

जलसों में ख़ल्वतों में ख़यालों में ख़्वाब में

अहमद हुसैन माइल

जा के मैं कू-ए-बुताँ में ये सदा देता हूँ

अहमद हुसैन माइल

हंगाम-ए-क़नाअ'त दिल-ए-मुर्दा हुआ ज़िंदा

अहमद हुसैन माइल

है हुक्म-ए-आम इश्क़ अलैहिस-सलाम का

अहमद हुसैन माइल

ग़ैर का हाल तो कहता हूँ नुजूमी बन कर

अहमद हुसैन माइल

गर बस चले तो आप फिरूँ अपने गर्द मैं

अहमद हुसैन माइल

दूर से यूँ दिया मुझे बोसा

अहमद हुसैन माइल

दुनिया ने मुँह पे डाला है पर्दा सराब का

अहमद हुसैन माइल

चाक-ए-दिल से झाँकिए दुनिया इधर से दीन उधर

अहमद हुसैन माइल

बंद-ए-क़बा में बाँध लिया ले के दिल मिरा

अहमद हुसैन माइल

अगरचे वो बे-पर्दा आए हुए हैं

अहमद हुसैन माइल

आसमाँ खाए तो ज़मीन देखे

अहमद हुसैन माइल

वो मेरी राह में काँटे बिछाए मैं लेकिन

अहमद हमदानी

तू मयस्सर था तो दिल में थे हज़ारों अरमाँ

अहमद हमदानी

क्यूँ हमारे साँस भी होते हैं लोगों पर गिराँ

अहमद हमदानी

अजीब वहशतें हिस्से में अपने आई हैं

अहमद हमदानी

ज़िंदगी! तुझ सा मुनाफ़िक़ भी कोई क्या होगा

अहमद फ़रीद

ज़ख़्म गिनता हूँ शब-ए-हिज्र में और सोचता हूँ

अहमद फ़रीद

सामने फिर मिरे अपने हैं सो मैं जानता हूँ

अहमद फ़रीद

सब पे खुलने की हमें ही आरज़ू शायद न थी

अहमद फ़रीद

अपना साया तो मैं दरिया में बहा आया था

अहमद फ़रीद

ज़िंदगी तेरी अता थी सो तिरे नाम की है

अहमद फ़राज़

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

अहमद फ़राज़