Couplets Poetry (page 574)
तिरी दुनिया में ऐ दिल हम भी इक गोशे में रहते हैं
अहमद जावेद
सुख की ख़ातिर दुख मत बेच
अहमद जावेद
मशग़ूल हैं सफ़ाई-ओ-तौसी-ए-दिल में हम
अहमद जावेद
ख़बर नहीं है मिरे बादशाह को शायद
अहमद जावेद
हमेशा दिल हवस-ए-इंतिक़ाम पर रक्खा
अहमद जावेद
घर और बयाबाँ में कोई फ़र्क़ नहीं है
अहमद जावेद
एक आँसू से कमी आ जाएगी
अहमद जावेद
दुनिया मिरे पड़ोस में आबाद है मगर
अहमद जावेद
दिल-ए-बेताब के हमराह सफ़र में रहना
अहमद जावेद
दिल से बाहर आज तक हम ने क़दम रक्खा नहीं
अहमद जावेद
अजब सफ़र था अजब-तर मुसाफ़िरत मेरी
अहमद जावेद
इक नई मंज़िल की धुन में दफ़अतन सरका लिया
अहमद हुसैन मुजाहिद
अगर हों गोया तो फिर बे-तकान बोलते हैं
अहमद हुसैन मुजाहिद
वो रात आए कि सर तेरा ले के बाज़ू पर
अहमद हुसैन माइल
वो बज़्म में हैं रोते हैं उश्शाक़ चौ तरफ़
अहमद हुसैन माइल
वाइ'ज़ का ए'तिराज़ ये बुत हैं ख़ुदा नहीं
अहमद हुसैन माइल
वा'दा किया है ग़ैर से और वो भी वस्ल का
अहमद हुसैन माइल
तुम को मालूम जवानी का मज़ा है कि नहीं
अहमद हुसैन माइल
तुम गले मिल कर जो कहते हो कि अब हद से न बढ़
अहमद हुसैन माइल
तौबा खड़ी है दर पे जो फ़रियाद के लिए
अहमद हुसैन माइल
सारी ख़िल्क़त राह में है और हो मंज़िल में तुम
अहमद हुसैन माइल
रमज़ाँ में तू न जा रू-ब-रू उन के 'माइल'
अहमद हुसैन माइल
प्यार अपने पे जो आता है तो क्या करते हैं
अहमद हुसैन माइल
नींद से उठ कर वो कहना याद है
अहमद हुसैन माइल
नाज़ कर नाज़ तिरे नाज़ पे है नाज़ मुझे
अहमद हुसैन माइल
नई सदा हो नए होंट हों नया लहजा
अहमद हुसैन माइल
मुसलमाँ काफ़िरों में हूँ मुसलामानों में काफ़िर हूँ
अहमद हुसैन माइल
मुझ से बिगड़ गए तो रक़ीबों की बन गई
अहमद हुसैन माइल
मोहब्बत ने 'माइल' किया हर किसी को
अहमद हुसैन माइल
मिटी कुछ बनी कुछ वो थी कुछ हुई कुछ
अहमद हुसैन माइल