Qita Poetry (page 7)
तैरे गीतों की लय अरे तौबा
अख़्तर अंसारी
तहलील
सय्यद ज़मीर जाफ़री
तड़प है क़ैस के दिल में तह-ए-ज़मीं इस से
मीर तक़ी मीर
ताब-ओ-ताक़त को तो रुख़्सत हुए मुद्दत गुज़री
मीर तक़ी मीर
ताबीरों की हसरत में कैसे कैसे ख़्वाब रहे
अतहर शाह ख़ान जैदी
तबस्सुम-ए-लब-ए-साक़ी चमन खिला ही गया
अली सरदार जाफ़री
सुर्ख़ होंटों की ताज़गी के लिए
प्रेम वारबर्टनी
सुर्ख़ आहन पर टपकती बूँद है अब हर ख़ुशी
क़तील शिफ़ाई
सूरत के आइने में दिल-ए-पाएमाल देख
अब्दुल हमीद अदम
सूरज के ख़ुदाओं की ये कोर-निगाही है
हबीब हाश्मी
सुपर-मैन
अनवर मसूद
सुना रहा हूँ किसी और को कथा अपनी
आबिद मलिक
सुना है चाह का दावा तुम्हारा
मीर तक़ी मीर
सुन के लोगों के ज़हर से फ़िक़रे
मुस्तफ़ा ज़ैदी
सुकूँ-पसंद जो दीवानगी मिरी होती
क़मर जलालवी
सुकून-ए-ज़िंदगी तर्क-ए-अमल का नाम है शायद
हफ़ीज़ जालंधरी
सुब्ह फूटी तो आसमाँ पे तिरे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सुब्ह की तनवीर बन कर आई वो नाज़ुक-ख़िराम
अख़्तर अंसारी
सोने चाँदी की चमकती हुई मीज़ानों में
साग़र सिद्दीक़ी
सो रही है गुलों के बिस्तर पर
अब्दुल हमीद अदम
सो गए अंजुम-ए-शब याद न आ
हबीब जालिब
सियासी अस्तबल
खालिद इरफ़ान
सितम-ईजाद के अंदाज़-ए-सितम तो देखो
दाग़ देहलवी
सितम से आश्ना होने को चाहे
नईम अख़्तर ख़ादिमी
सिर्फ़ कहती रहोगी ऐ बेगम
साग़र ख़य्यामी
सिर्फ़ कह दूँ कि नाव डूब गई
मुस्तफ़ा ज़ैदी
सिलसिले ऊँचे ख़यालात से जोड़े हम ने
आसिम पीरज़ादा
सिगनल
अमीरुल इस्लाम हाशमी
शीशा-ए-दिल को अगर ठेस कोई लगती है
अली सरदार जाफ़री
शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए
अब्दुल हमीद अदम