Qita Poetry (page 8)

शे'र की मैं रदीफ़ बन जाऊँ

अफ़ज़ल इलाहाबादी

शौक़-ओ-अरमाँ की बे-क़रारी को

महेश चंद्र नक़्श

शर्म दहशत झिझक परेशानी

जौन एलिया

शम्-ए-ज़र्रीं की नर्म लौ ऐ दोस्त

महेश चंद्र नक़्श

शम्अ रौशन है सर-ए-बज़्म निगाहों में मगर

जावेद कमाल रामपुरी

शम्अ की तरह पिघलते हुए दिल देखे हैं

अली सरदार जाफ़री

शाम है और पार नद्दी के

अब्दुल हमीद अदम

शाम और रस्ते में रेवड़ के गुज़रने से ग़ुबार

एहसान दानिश

शायर-ए-आज़म

ज़ियाउल हक़ क़ासमी

शाएर हूँ और अमीं हूँ उरूस-ए-सुख़न का मैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

सेहन-ए-गुलशन में ढूँडती है कभी

साबिर दत्त

सज़ा ये दी है कि आँखों से छीन लीं नींदें

आमिर उस्मानी

सवार-ए-नाक़ा-ओ-महमिल नहीं मैं

अल्लामा इक़बाल

सावन की ये रुत और ये झूलों की क़तारें

अहमद नदीम क़ासमी

सौ मुश्किलें थीं इश्क़ के आज़ार के लिए

रज़ा बिजनौरी

साथ छूटे थे साथ छूटे हैं

अंजुम रहबर

सरहद-ए-होश से गुज़रता हूँ

नरेश कुमार शाद

सर्फ़-ए-तस्कीं है दस्त-ए-नाज़ तिरा

जाँ निसार अख़्तर

सर-ए-कहकशाँ मिरा अक्स हो

अमजद इस्लाम अमजद

सारे आलम में ये उड़ता हुआ गुल-रंग निशाँ

अली सरदार जाफ़री

सारा जहाँ है चाँद की किरनों से सीम-गूँ

अख़्तर अंसारी

सर में तकमील का था इक सौदा

जौन एलिया

साक़िया साक़िया सँभाल उसे

नरेश कुमार शाद

साक़िया एक जाम पीने से

साग़र सिद्दीक़ी

सनसनाती हुई हवा की तरह

प्रेम वारबर्टनी

सामने दुख़्तर-ए-बरहमन है

हफ़ीज़ जालंधरी

समेट लो ज़रा आँचल कि रौशनी फैले

गणेश बिहारी तर्ज़

साल-हा-साल फ़ज़ाओं में शरर-बार रही

अली सरदार जाफ़री

साल-हा-साल और इक लम्हा

जौन एलिया

सख़्त-जाँ भी हैं और नाज़ुक भी

कश्मीरी लाल ज़ाकिर