Qita Poetry (page 9)

सैलाब-ए-बला

पॉपुलर मेरठी

सई-ए-राहत हो गई ख़्वाब-ओ-ख़याल

अख़्तर अंसारी

सहरा सहरा ग़म के बगूले बस्ती बस्ती दर्द की आग

आमिर उस्मानी

साहिल पे इक थके हुए जोगी की बंसरी

अब्दुल हमीद अदम

सहेली की सहेली 'अर्शिया-हक़'

सय्यदा अरशिया हक़

''साहब-ज़ादे करते क्या हैं'' लड़की वालों ने पूछा

अतहर शाह ख़ान जैदी

'साग़र' किसे बताइए ये वोल्टेज का हाल

साग़र ख़य्यामी

सच तो ये है जहाँ में मेरे ब'अद

अख़्तर अंसारी

सब्ज़ा-ज़ारों में गुज़र था अपना

हबीब जालिब

सबा के हाथ में नर्मी है उन के हाथों की

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

रुख़्सार हैं या अक्स है बर्ग-ए-गुल-ए-तर का

अहमद नदीम क़ासमी

रूह को एक आह का हक़ है

अब्दुल हमीद अदम

रूह की आँच में उबाला है

नरेश कुमार शाद

रोज़ इक बाग़ गुज़रता है इसी रस्ते से

आबिद मलिक

रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं

एहसान दानिश

रेश-ए-गुल को रग-ए-संग बनाने वालो

अहमद नदीम क़ासमी

रज़ा

गुलज़ार बुख़ारी

रेट इतने बढ़े हैं जूतों के

आसिम पीरज़ादा

रंग-ए-हर्फ़-ए-सदा की दुनिया में

अहमद नदीम क़ासमी

रंग-अफ़्शाँ हो जिस तरह उमीद

महेश चंद्र नक़्श

रंग पर रंग निखरते ही चले आते हैं

अली सरदार जाफ़री

रंग ओ बू-ए-गुलाब कह लूँगा

हबीब जालिब

रंग ख़ुशबू गुलाब दे मुझ को

अतहर शाह ख़ान जैदी

रम्ज़-ओ-ईमा इस ज़माने के लिए मौज़ूँ नहीं

अल्लामा इक़बाल

रेल ने सीटी बजाई 'शोर' ओ 'दामन' चल दिए

एहसान दानिश

रह-ओ-रस्म-ए-हरम ना-मोहरिमानग

अल्लामा इक़बाल

रहा बरसात में ऐ शैख़ मैं सूखा न तू सूखा

क़मर जलालवी

रगों में वो लहू बाक़ी नहीं है

अल्लामा इक़बाल

रफ़्ता रफ़्ता सब साथी साथ छोड़ आए थे

आमिर उस्मानी

रफ़्ता रफ़्ता हर पुलीस वाले को शाएर कर दिया

साग़र ख़य्यामी