Qita Poetry (page 5)

उजड़ी दुनिया को बसाया है ज़रा देखो तो

अख़्तर अंसारी

उजड़ा सा वो नगर कि हड़प्पा है जिस का नाम

अनवर मसूद

उफ़ ये उम्मीद-ओ-बीम का आलम

जाँ निसार अख़्तर

उधार

सय्यद ज़मीर जाफ़री

उदास चाँद ने बदली की आड़ में हो कर

अहमद नदीम क़ासमी

टीवी

इनाम-उल-हक़ जावेद

तुम्हारी याद के उजड़े हुए, उदास चमन

कश्मीरी लाल ज़ाकिर

तुम्हारे हुस्न से रहती है हम-कनार नज़र

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे हुस्न को मेरी नज़र लगी है ज़रूर

अब्दुल हमीद अदम

तुम ये कहते हो इक सवाल हो तुम

सय्यदा अरशिया हक़

तुम तो यूँही हुए हो अफ़्सुर्दा

फ़य्याज़ अस्वद

तुम रंग हो तुम नूर हो तुम शीशा हो तुम जाम

अज्ञात

तुम गुनाहों से डर के जीते हो

कश्मीरी लाल ज़ाकिर

तुम घटाओं का एहतिमाम करो

कश्मीरी लाल ज़ाकिर

तुझ से बिछड़ा तो सोचता हूँ मैं

वसीम बरेलवी

तुझे पाया कि तुझ को खो दिया है

हबीब जालिब

तू ने किस दिल को दुखाया है तुझे क्या मालूम

मख़दूम मुहिउद्दीन

तू ने ख़ुद तल्ख़ बना रक्खी है दुनिया अपनी

अली सरदार जाफ़री

तू नहीं है न सही तेरी मोहब्बत का ख़याल

अली सरदार जाफ़री

तू मिरी ज़िंदगी का परतव है

नरेश कुमार शाद

तू मिरे साथ अब नहीं है दोस्त

कश्मीरी लाल ज़ाकिर

तू हक़ीक़त को समझता है तिलिस्मी तस्वीर

अली सरदार जाफ़री

तू है ज़ाहिर परस्त ऐ दुनिया

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तू भला है तो बुरा हो नहीं सकता ऐ 'ज़ौक़'

ज़ौक़

तितली कोई बे-तरह भटक कर

जाँ निसार अख़्तर

तीरगी के घने हिजाबों में

अब्दुल हमीद अदम

तिमतिमाते हैं सुलगते हुए रुख़्सार तिरे

अहमद नदीम क़ासमी

थुरू-प्रॉपर चैनल

अनवर मसूद

ठोकरों से बिखर नहीं सकती

प्रबुद्ध सौरभ

थोड़ी मय नज़्र-ए-जाम कर दीजे

दिलावर सिंह