Couplets Poetry (page 164)
जो तिरे ख़ित्ता-ए-बे-आब की ख़्वाहिश न बना
सईद अहमद
जल थल का ख़्वाब था कि किनारे डुबो गया
सईद अहमद
हम भी उसी के साथ गए होश से 'सईद'
सईद अहमद
ख़फ़ा रहने लगे हो मुझ से अक्सर
सईद आसिम
वही क़द्र 'फ़ाएज़' की जाने बहुत
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
उश्शाक़ जाँ-ब-कफ़ खड़े हैं तेरे आस-पास
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
तुझ को है हम से जुदाई आरज़ू
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
रात दिन तू रहे रक़ीबाँ-संग
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
पानी होवे आरसी उस मुख को देख
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
जो कहिए उस के हक़ में कम है बे-शक
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
अब्र का साया ओ सब्ज़ा राह का
सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़
ज़िंदा रहने के थे जितने उस्लूब
सादिक़ नसीम
तुम्हारा नाम किसी अजनबी के लब पर था
सादिक़ नसीम
जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
सादिक़ नसीम
उठा ही लाया सभी रास्ते वो काँधों पर
सादिक़
उन की याद में बहते आँसू ख़ुश्क अगर हो जाएँगे
सादिक़
काट आगाहियों की फ़स्ल मगर
सादिक़
इस घूमती ज़मीन का मेहवर ही तोड़ दो
सादिक़
गुमाँ न था कि लिफ़ाफ़े में ख़त के बदले वो
सादिक़
फ़ुर्सत हो तो ये जिस्म भी मिट्टी में दबा दो
सादिक़
अपने गले पे चलती छुरी का भी ध्यान रख
सादिक़
वो तो ख़ुश्बू है हर इक सम्त बिखरना है उसे
सदा अम्बालवी
वक़्त के साथ 'सदा' बदले तअल्लुक़ कितने
सदा अम्बालवी
वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
सदा अम्बालवी
उन्हें न तोलिये तहज़ीब के तराज़ू में
सदा अम्बालवी
तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
सदा अम्बालवी
शेर में साथ रवानी के मआनी भी तो भर
सदा अम्बालवी
'सदा' के पास है दुनिया का तजरबा वाइज़
सदा अम्बालवी