Couplets Poetry (page 163)

रुस्वाई तो वैसे भी तक़दीर है आशिक़ की

सईद राही

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

सईद राही

मैं न पीता तो तिरा लिख्खा ग़लत हो जाता

सईद राही

गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजिए

सईद राही

गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजे

सईद राही

दोस्त बन बन के मिले मुझ को मिटाने वाले

सईद राही

उसी के लुत्फ़ से बस्ती निहाल है सारी

सईद क़ैस

तुम से मिलने का बहाना तक नहीं

सईद क़ैस

तुम अपने दरिया का रोना रोने आ जाते हो

सईद क़ैस

मैं भी अपनी ज़ात में आबाद हूँ

सईद क़ैस

चेहरा चेहरा ग़म है अपने मंज़र में

सईद क़ैस

अपनी आवाज़ सुनाई नहीं देती मुझ को

सईद क़ैस

ये ख़ुद-नविश्त तो मुझ को अधूरी लगती है

सईद नक़वी

तू मेरी तिश्ना-लबी पर सवाल करता है

सईद नक़वी

मैं दूर दूर से ख़ुद को उठा के लाता रहा

सईद नक़वी

मैं अपने सारे सवालों के जानता हूँ जवाब

सईद नक़वी

कुछ लोग थे सफ़र में मगर हम-ज़बाँ न थे

सईद नक़वी

जब आईने दर-ओ-दीवार पर निकल आएँ

सईद नक़वी

इब्तिदा मुझ में इंतिहा मुझ में

सईद नक़वी

चीज़ें अपनी जगह पे रहती हैं

सईद नक़वी

निकल के जाऊँ कहाँ मैं हिसार-ए-गर्दिश से

सईद ख़ान

यक़ीं उठ जाए अपने दस्त-ओ-पा से

सईद अख़्तर

किस के हाथों में हैं पत्थर कौन ख़ाली हाथ है

सईद अख़्तर

सुलग रहा है चमन में बहार का मौसम

सईद अहमद अख़्तर

उस दिन से पानियों की तरह बह रहे हैं हम

सईद अहमद

शोरिश-ए-वक़्त हुई वक़्त की रफ़्तार में गुम

सईद अहमद

सब करिश्मे तअल्लुक़ात के हैं

सईद अहमद

मिरा वजूद हवाला तिरा हुआ आख़िर

सईद अहमद

कुछ लोग इब्तिदा-ए-रिफ़ाक़त से क़ब्ल ही

सईद अहमद

ख़ुश्क पत्तों में किसी याद का शोला है 'सईद'

सईद अहमद