Couplets Poetry (page 236)

एहसास-ए-तीरगी था उसे रौशनी के बा'द

नवाब अहसन

बिखरे हुए ख़्वाबों की वो तस्वीर है शायद

नवाब अहसन

फ़ोन पर बात हुई उस से तो अंदाज़ा हुआ

नवनीत शर्मा

मिरे क़रीब कोई ख़्वाब कैसे आ पाता

नवनीत शर्मा

मिरे अंदर मिरा कुछ भी नहीं बस तू है बाक़ी

नवनीत शर्मा

किस ने सोचा था कि ख़ुद से मिल कर

नवनीत शर्मा

जिया हूँ उम्र भर मैं भी अकेला

नवनीत शर्मा

एक तस्वीर को हटाया बस

नवनीत शर्मा

चोट खाए हुए लम्हों का सितम है कि उसे

नवनीत शर्मा

अपना बादल तलाशने के लिए

नवनीत शर्मा

प्यास को प्यार करना था केवल

नवीन सी. चतुर्वेदी

परसों मैं बाज़ार गया था दर्पन लेने की ख़ातिर

नवीन सी. चतुर्वेदी

नए सफ़र का हर इक मोड़ भी नया था मगर

नवीन सी. चतुर्वेदी

मिरा साया मिरे बस में नहीं है

नवीन सी. चतुर्वेदी

कुछ भँवर यूँ उचट पड़े थे ज्यूँ

नवीन सी. चतुर्वेदी

किस को फ़ुर्सत है जो हर्फ़ों की हरारत समझाए

नवीन सी. चतुर्वेदी

हम तो उस के ज़ेहन की उर्यानियों पर मर मिटे

नवीन सी. चतुर्वेदी

भुला दिया है जो तू ने तो कुछ मलाल नहीं

नवीन सी. चतुर्वेदी

बैठे-बैठे का सफ़र सिर्फ़ है ख़्वाबों का फ़ुतूर

नवीन सी. चतुर्वेदी

बग़ैर पूछे मिरे सर में भर दिया मज़हब

नवीन सी. चतुर्वेदी

अब हवाओं के दाम खुलने हैं

नवीन सी. चतुर्वेदी

मैं ख़ुद को दूसरों से क्या जुदा करूँ

नवेद रज़ा

जुदा हुए तो जुदाई में ये कमाल भी था

नवेद रज़ा

दिल पर तेरी चुप से लगने वाला दाग़

नवेद रज़ा

शिकस्त ओ फ़तह मियाँ इत्तिफ़ाक़ है लेकिन

नवाब मोहम्मद यार ख़ाँ अमीर

ज़िंदगी मुख़्तसर मिली थी हमें

नौशाद अली

सामने उस के एक भी न चली

नौशाद अली

करना है शाइरी अगर 'नौशाद'

नौशाद अली

इक बे-क़रार दिल से मुलाक़ात कीजिए

नौशाद अली

आबादियों में दश्त का मंज़र भी आएगा

नौशाद अली