Couplets Poetry (page 323)
दरिया को किनारे से क्या देखते रहते हो
इनाम नदीम
बुझ जाएगा इक रोज़ तिरी याद का शोला
इनाम नदीम
अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है
इनाम नदीम
गुज़री सवाल-ए-वस्ल के चक्कर में सारी उम्र
इनाम दुर्रानी
अब यूँ ही देखता हूँ रस्ता
इम्तियाज़-उल-हक़ इम्तियाज़
उसी दरख़्त को मौसम ने बे-लिबास किया
इम्तियाज़ साग़र
होगा बहुत शदीद तमाज़त का इंतिक़ाम
इम्तियाज़ साग़र
हैं घर की मुहाफ़िज़ मिरी दहकी हुई आँखें
इम्तियाज़ साग़र
वक़्त हर ज़ख़्म को भर देता है कुछ भी कीजे
इमरान-उल-हक़ चौहान
रंग हो रौशनी हो या ख़ुशबू
इमरान-उल-हक़ चौहान
क्या जाने शाख़-ए-वक़्त से किस वक़्त गिर पड़ूँ
इमरान-उल-हक़ चौहान
ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते
इमरान-उल-हक़ चौहान
हार ही जीत है आईन-ए-वफ़ा की रू से
इमरान-उल-हक़ चौहान
अपने लहू में ज़हर भी ख़ुद घोलता हूँ मैं
इमरान-उल-हक़ चौहान
अजीब ख़ौफ़ का मौसम है इन दिनों 'इमरान'
इमरान-उल-हक़ चौहान
पहली सिगरेट पहला ख़्वाब और पहला इश्क़
इमरान शमशाद
एक बार फिर सलाम दूर जाने वालों को
इमरान शमशाद
अच्छा अच्छा हो जाएगा सब कुछ अच्छा
इमरान शमशाद
इस लिए सब से अलग है मिरी ख़ुशबू 'आमी'
इमरान आमी
उल्टी क्यूँ पड़ती है तदबीर ये हम क्या जानें
इम्दाद इमाम असर
तुम्हारे आशिक़ों में बे-क़रारी क्या ही फैली है
इम्दाद इमाम असर
तेरी जानिब से मुझ पे क्या न हुआ
इम्दाद इमाम असर
तड़प तड़प के तमन्ना में करवटें बदलीं
इम्दाद इमाम असर
साथ दुनिया का नहीं तालिब-ए-दुनिया देते
इम्दाद इमाम असर
पा रहा है दिल मुसीबत के मज़े
इम्दाद इमाम असर
मुश्किल का सामना हो तो हिम्मत न हारिए
इम्दाद इमाम असर
मुफ़्त बोसा हसीं नहीं देते
इम्दाद इमाम असर
मर ही कर उट्ठेंगे तेरे दर से हम
इम्दाद इमाम असर
लोग जब तेरा नाम लेते हैं
इम्दाद इमाम असर
कुछ समझ कर उस मह-ए-ख़ूबी से की थी दोस्ती
इम्दाद इमाम असर