Couplets Poetry (page 324)

ख़ुदा जाने 'असर' को क्या हुआ है

इम्दाद इमाम असर

ख़ूब-ओ-ज़िश्त-ए-जहाँ का फ़र्क़ न पूछ

इम्दाद इमाम असर

करता है ऐ 'असर' दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता का गिला

इम्दाद इमाम असर

कैसा आना कैसा जाना मेरे घर क्या आओगे

इम्दाद इमाम असर

जब नहीं कुछ ए'तिबार-ए-ज़िंदगी

इम्दाद इमाम असर

जान कर 'मीर' का कलाम 'असर'

इम्दाद इमाम असर

इबादत ख़ुदा की ब-उम्मीद-ए-हूर

इम्दाद इमाम असर

हसीनों की जफ़ाएँ भी तलव्वुन से नहीं ख़ाली

इम्दाद इमाम असर

गुलशन में कौन बुलबुल-ए-नालाँ को दे पनाह

इम्दाद इमाम असर

दोस्ती की तुम ने दुश्मन से अजब तुम दोस्त हो

इम्दाद इमाम असर

दिल से क्या पूछता है ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर से पूछ

इम्दाद इमाम असर

दिल न देते उसे तो क्या करते

इम्दाद इमाम असर

दिल की हालत से ख़बर देती है

इम्दाद इमाम असर

बनाते हैं हज़ारों ज़ख़्म-ए-ख़ंदाँ ख़ंजर-ए-ग़म से

इम्दाद इमाम असर

अब जहाँ पर है शैख़ की मस्जिद

इम्दाद इमाम असर

आइना देख के फ़रमाते हैं

इम्दाद इमाम असर

मुसालहत का पढ़ा है जब से निसाब मैं ने

इम्दाद हमदानी

ख़िज़ाँ का ज़हर सारे शहर की रग रग में उतरा है

इम्दाद हमदानी

ज़ालिम हमारी आज की ये बात याद रख

इमदाद अली बहर

मुद्दत से इल्तिफ़ात मिरे हाल पर नहीं

इमदाद अली बहर

मेरा दिल किस ने लिया नाम बताऊँ किस का

इमदाद अली बहर

क्या क्या न मुझ से संग-दिली दिलबरों ने की

इमदाद अली बहर

अफ़्सोस उम्र कट गई रंज-ओ-मलाल में

इमदाद अली बहर

आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे

इमदाद अली बहर

उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी

इम्दाद आकाश

अज़ीज़ गर था तअल्लुक़ तो किस लिए तोड़ा

इम्दाद आकाश

ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम

इमाम बख़्श नासिख़

वो नहीं भूलता जहाँ जाऊँ

इमाम बख़्श नासिख़

तीन त्रिबेनी हैं दो आँखें मिरी

इमाम बख़्श नासिख़

तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत

इमाम बख़्श नासिख़