Couplets Poetry (page 349)
कितनी बे-रंग थी दुनिया मिरे ख़्वाबों की 'जमील'
हसन जमील
'हसन-जमील' तिरा घर अगर ज़मीन पे है
हसन जमील
अभी वो ख़ुद को ही देखे जाता है आइने में
हसन जमील
उल्फ़त हो किसी की न मोहब्बत हो किसी की
हसन बरेलवी
शीशा उठा कर ताक़ से हम ने
हसन बरेलवी
पूछते जाते हैं ये हम सब से
हसन बरेलवी
ओ वस्ल में मुँह छुपाने वाले
हसन बरेलवी
क्या कहूँ क्या है मेरे दिल की ख़ुशी
हसन बरेलवी
किस के चेहरे से उठ गया पर्दा
हसन बरेलवी
जो ख़ास जल्वे थे उश्शाक़ की नज़र के लिए
हसन बरेलवी
जान अगर हो जान तो क्यूँ-कर न हो तुझ पर निसार
हसन बरेलवी
इश्क़ में बे-ताबियाँ होती हैं लेकिन ऐ 'हसन'
हसन बरेलवी
हमारे घर से जाना मुस्कुरा कर फिर ये फ़रमाना
हसन बरेलवी
गुलशन-ए-ख़ुल्द की क्या बात है क्या कहता है
हसन बरेलवी
एक कह कर जिस ने सुननी हो हज़ारों बातें
हसन बरेलवी
दिल को जानाँ से 'हसन' समझा-बुझा के लाए थे
हसन बरेलवी
देख आओ मरीज़-ए-फ़ुर्क़त को
हसन बरेलवी
चोट जब दिल पर लगे फ़रियाद पैदा क्यूँ न हो
हसन बरेलवी
बोले वो बोसा-हा-ए-पैहम पर
हसन बरेलवी
अब्र है गुलज़ार है मय है ख़ुशी का दौर है
हसन बरेलवी
आप की ज़िद ने मुझे और पिलाई हज़रत
हसन बरेलवी
आई क्या जी में तेग़-ए-क़ातिल के
हसन बरेलवी
मैं टूटने देता नहीं रंगों का तसलसुल
हसन अज़ीज़
इक क़िस्सा-ए-तवील है अफ़्साना दश्त का
हसन अज़ीज़
देखूँ वो करती है अब के अलम-आराई कि मैं
हसन अज़ीज़
भटक रहा हूँ मैं इस दश्त-ए-संग में कब से
हसन अज़ीज़
सफ़ीने डूब गए कितने दिल के सागर में
हसन अख्तर जलील
मुझ को 'जलील' कौन कहेगा शिकस्ता-दिल
हसन अख्तर जलील
मैं न दरिया हूँ न साहिल न सफ़ीना न भँवर
हसन अख्तर जलील
हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो
हसन अख्तर जलील