Couplets Poetry (page 447)

न देखना कभी आईना भूल कर देखो

बेख़ुद देहलवी

न देखे होंगे रिंद-ए-ला-उबाली तुम ने 'बेख़ुद' से

बेख़ुद देहलवी

मुँह फेर कर वो कहते हैं बस मान जाइए

बेख़ुद देहलवी

मुँह में वाइज़ के भी भर आता है पानी अक्सर

बेख़ुद देहलवी

मुझ को न दिल पसंद न वो बेवफ़ा पसंद

बेख़ुद देहलवी

मोहब्बत और मजनूँ हम तो सौदा इस को कहते हैं

बेख़ुद देहलवी

मिला के ख़ाक में सर्मा-ए-दिल-ए-'बेख़ुद'

बेख़ुद देहलवी

मेरा हर शेर है इक राज़-ए-हक़ीक़त 'बेख़ुद'

बेख़ुद देहलवी

मौत आ रही है वादे पे या आ रहे हो तुम

बेख़ुद देहलवी

महफ़िल वही मकान वही आदमी वही

बेख़ुद देहलवी

क्या कह दिया ये आप ने चुपके से कान में

बेख़ुद देहलवी

कुछ तरह रिंदों ने दी कुछ मोहतसिब भी दब गया

बेख़ुद देहलवी

कोई इस तरह से मिलने का मज़ा मिलता है

बेख़ुद देहलवी

झूटा जो कहा मैं ने तो शर्मा के वो बोले

बेख़ुद देहलवी

जवाब सोच के वो दिल में मुस्कुराते हैं

बेख़ुद देहलवी

जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में

बेख़ुद देहलवी

इस जबीन-ए-अरक़-अफ़्शाँ पे न चुनिए अफ़्शाँ

बेख़ुद देहलवी

इजाज़त माँगती है दुख़्त-ए-रज़ महफ़िल में आने की

बेख़ुद देहलवी

हूरों से न होगी ये मुदारात किसी की

बेख़ुद देहलवी

हो लिए जिस के हो लिए 'बेख़ुद'

बेख़ुद देहलवी

हमें पीने से मतलब है जगह की क़ैद क्या 'बेख़ुद'

बेख़ुद देहलवी

हमें इस्लाम उसे इतना तअल्लुक़ है अभी बाक़ी

बेख़ुद देहलवी

ग़म में डूबे ही रहे दम न हमारा निकला

बेख़ुद देहलवी

दिल तो लेते हो मगर ये भी रहे याद तुम्हें

बेख़ुद देहलवी

दिल मोहब्बत से भर गया 'बेख़ुद'

बेख़ुद देहलवी

दिल में फिर वस्ल के अरमान चले आते हैं

बेख़ुद देहलवी

दिल हुआ जान हुई उन की भला क्या क़ीमत

बेख़ुद देहलवी

दिल चुरा कर ले गया था कोई शख़्स

बेख़ुद देहलवी

दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा

बेख़ुद देहलवी

चश्म-ए-बद-दूर वो भोले भी हैं नादाँ भी हैं

बेख़ुद देहलवी