Couplets Poetry (page 448)

चलने की नहीं आज कोई घात किसी की

बेख़ुद देहलवी

बोले वो मुस्कुरा के बहुत इल्तिजा के ब'अद

बेख़ुद देहलवी

भूले से कहा मान भी लेते हैं किसी का

बेख़ुद देहलवी

'बेख़ुद' ज़रूर रात को सोए हो पी के तुम

बेख़ुद देहलवी

'बेख़ुद' तो मर मिटे जो कहा उस ने नाज़ से

बेख़ुद देहलवी

बात वो कहिए कि जिस बात के सौ पहलू हों

बेख़ुद देहलवी

बात करने की शब-ए-वस्ल इजाज़त दे दो

बेख़ुद देहलवी

अपने जल्वे का वो ख़ुद आप तमाशाई है

बेख़ुद देहलवी

ऐ शैख़ आदमी के भी दर्जे हैं मुख़्तलिफ़

बेख़ुद देहलवी

अदाएँ देखने बैठे हो क्या आईने में अपनी

बेख़ुद देहलवी

अब आप कोई काम सिखा दीजिए हम को

बेख़ुद देहलवी

आप को रंज हुआ आप के दुश्मन रोए

बेख़ुद देहलवी

आप शर्मा के न फ़रमाएँ हमें याद नहीं

बेख़ुद देहलवी

आप हों हम हों मय-ए-नाब हो तन्हाई हो

बेख़ुद देहलवी

आइना देख के ख़ुर्शीद पे करते हैं नज़र

बेख़ुद देहलवी

आइना देख कर वो ये समझे

बेख़ुद देहलवी

वो उन का वस्ल में ये कह के मुस्कुरा देना

बेखुद बदायुनी

वो जो कर रहे हैं बजा कर रहे हैं

बेखुद बदायुनी

वाइज़ ओ मोहतसिब का जमघट है

बेखुद बदायुनी

उन की हसरत भी नहीं मैं भी नहीं दिल भी नहीं

बेखुद बदायुनी

शिकवा सुन कर जो मिज़ाज-ए-बुत-ए-बद-ख़ू बदला

बेखुद बदायुनी

शिफ़ा क्या हो नहीं सकती हमें लेकिन नहीं होती

बेखुद बदायुनी

न मुदारात हमारी न अदू से नफ़रत

बेखुद बदायुनी

ख़ून हो जाएँ ख़ाक में मिल जाएँ

बेखुद बदायुनी

कभी हया उन्हें आई कभी ग़ुरूर आया

बेखुद बदायुनी

हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं

बेखुद बदायुनी

गर्दिश-ए-बख़्त से बढ़ती ही चली जाती हैं

बेखुद बदायुनी

दैर-ओ-हरम को देख लिया ख़ाक भी नहीं

बेखुद बदायुनी

बैठता है हमेशा रिंदों में

बेखुद बदायुनी

आँसू मिरी आँखों में हैं नाले मिरे लब पर

बेखुद बदायुनी