Couplets Poetry (page 454)

तहज़ीब के लिबास उतर जाएँगे जनाब

बशीर बद्र

सुनाते हैं मुझे ख़्वाबों की दास्ताँ अक्सर

बशीर बद्र

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

बशीर बद्र

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

बशीर बद्र

सब लोग अपने अपने ख़ुदाओं को लाए थे

बशीर बद्र

रोने वालों ने उठा रक्खा था घर सर पर मगर

बशीर बद्र

रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा

बशीर बद्र

रात का इंतिज़ार कौन करे

बशीर बद्र

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर हैं यहाँ

बशीर बद्र

फूलों में ग़ज़ल रखना ये रात की रानी है

बशीर बद्र

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

बशीर बद्र

फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम

बशीर बद्र

फिर से ख़ुदा बनाएगा कोई नया जहाँ

बशीर बद्र

पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला

बशीर बद्र

पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है

बशीर बद्र

पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा

बशीर बद्र

पहचान अपनी हम ने मिटाई है इस तरह

बशीर बद्र

नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा

बशीर बद्र

नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही

बशीर बद्र

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं

बशीर बद्र

न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर

बशीर बद्र

न तुम होश में हो न हम होश में हैं

बशीर बद्र

न जी भर के देखा न कुछ बात की

बशीर बद्र

न जाने कब तिरे दिल पर नई सी दस्तक हो

बशीर बद्र

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी

बशीर बद्र

मुख़ालिफ़त से मिरी शख़्सियत सँवरती है

बशीर बद्र

मुझ से क्या बात लिखानी है कि अब मेरे लिए

बशीर बद्र

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा

बशीर बद्र