Couplets Poetry (page 453)

ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं

बशीर बद्र

ये एक पेड़ है आ इस से मिल के रो लें हम

बशीर बद्र

यारो नए मौसम ने ये एहसान किए हैं

बशीर बद्र

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं

बशीर बद्र

यहाँ एक बच्चे के ख़ून से जो लिखा हुआ है उसे पढ़ें

बशीर बद्र

वो शख़्स जिस को दिल ओ जाँ से बढ़ के चाहा था

बशीर बद्र

वो माथा का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे

बशीर बद्र

वो जिन के ज़िक्र से रगों में दौड़ती थीं बिजलियाँ

बशीर बद्र

वो इत्र-दान सा लहजा मिरे बुज़ुर्गों का

बशीर बद्र

वो इंतिज़ार की चौखट पे सो गया होगा

बशीर बद्र

वो चेहरा किताबी रहा सामने

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे

बशीर बद्र

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से

बशीर बद्र

उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया

बशीर बद्र

उस की आँखों को ग़ौर से देखो

बशीर बद्र

उसे पाक नज़रों से चूमना भी इबादतों में शुमार है

बशीर बद्र

उन्हीं रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे

बशीर बद्र

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

बशीर बद्र

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

बशीर बद्र

उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं

बशीर बद्र

तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा

बशीर बद्र

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा था

बशीर बद्र

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है

बशीर बद्र

तुम्हारे घर के सभी रास्तों को काट गई

बशीर बद्र

तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगा

बशीर बद्र

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो

बशीर बद्र

तुम अभी शहर में क्या नए आए हो

बशीर बद्र

तिरी आरज़ू तिरी जुस्तुजू में भटक रहा था गली गली

बशीर बद्र