Couplets Poetry (page 451)

याद में ख़्वाब में तसव्वुर में

बयान मेरठी

वो पोशीदा रखते हैं अपना तअ'ल्लुक़

बयान मेरठी

वो हटे आँख के आगे से तो बस सूरत-ए-अक्स

बयान मेरठी

वही उठाए मुझे जो बने मिरा मज़दूर

बयान मेरठी

शैख़ के माथे पे मिट्टी बरहमन के बर में बुत

बयान मेरठी

पार दरिया-ए-शहादत से उतर जाते हैं सर

बयान मेरठी

नैरंगियाँ फ़लक की जभी हैं कि हों बहम

बयान मेरठी

नहीं ये आदमी का काम वाइ'ज़

बयान मेरठी

कभी हँसाया कभी रुलाया कभी रुलाया कभी हँसाया

बयान मेरठी

हज़ारों दिल मसल कर पैर से झुँझला के यूँ बोले

बयान मेरठी

हवा-ए-वहशत दिल ले उड़ी कहाँ से कहाँ

बयान मेरठी

गौहर-ए-मक़्सद मिले गर चर्ख़-ए-मीनाई न हो

बयान मेरठी

दिल आया है क़यामत है मिरा दिल

बयान मेरठी

ऐ तन-परस्त जामा-ए-सूरत कसीफ़ है

बयान मेरठी

अदाएँ ता-अबद बिखरी पड़ी हैं

बयान मेरठी

सीरत के हम ग़ुलाम हैं सूरत हुई तो क्या

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

लहू टपका किसी की आरज़ू से

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

हम सरगुज़िश्त क्या कहें अपनी कि मिस्ल-ए-ख़ार

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

दिलबरों के शहर में बेगानगी अंधेर है

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

अर्श तक जाती थी अब लब तक भी आ सकती नहीं

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

तू जब सामने होता है

बासिर सुल्तान काज़मी

तेरे दिए हुए दुख

बासिर सुल्तान काज़मी

रुक गया हाथ तिरा क्यूँ 'बासिर'

बासिर सुल्तान काज़मी

कुछ तो हस्सास हम ज़ियादा हैं

बासिर सुल्तान काज़मी

ख़त्म हुईं सारी बातें

बासिर सुल्तान काज़मी

कैसे याद रही तुझ को

बासिर सुल्तान काज़मी

जब भी मिले हम उन से उन्हों ने यही कहा

बासिर सुल्तान काज़मी

गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी

बासिर सुल्तान काज़मी

दिल लगा लेते हैं अहल-ए-दिल वतन कोई भी हो

बासिर सुल्तान काज़मी

चमकी थी एक बर्क़ सी फूलों के आस-पास

बासिर सुल्तान काज़मी