Couplets Poetry (page 455)
मुझे लगता है दिल खिंच कर चला आता है हाथों पर
बशीर बद्र
मुझे इश्तिहार सी लगती हैं ये मोहब्बतों की कहानियाँ
बशीर बद्र
मुद्दत से इक लड़की के रुख़्सार की धूप नहीं आई
बशीर बद्र
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
बशीर बद्र
मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
बशीर बद्र
मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी
बशीर बद्र
मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे
बशीर बद्र
मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफ़र में
बशीर बद्र
मेरा शैतान मर गया शायद
बशीर बद्र
मंदिर गए मस्जिद गए पीरों फ़क़ीरों से मिले
बशीर बद्र
मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा
बशीर बद्र
मैं ने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ माँगी थी
बशीर बद्र
मैं यूँ भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ
बशीर बद्र
मैं तमाम तारे उठा उठा के ग़रीब लोगों में बाँट दूँ
बशीर बद्र
मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
बशीर बद्र
मैं जिस की आँख का आँसू था उस ने क़द्र न की
बशीर बद्र
मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना
बशीर बद्र
मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा
बशीर बद्र
मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो
बशीर बद्र
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
बशीर बद्र
महलों में हम ने कितने सितारे सजा दिए
बशीर बद्र
महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
बशीर बद्र
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
बशीर बद्र
लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए
बशीर बद्र
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
बशीर बद्र
कोई फूल सा हाथ काँधे पे था
बशीर बद्र
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
बशीर बद्र
कोई बादल हो तो थम जाए मगर अश्क मिरे
बशीर बद्र
कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया
बशीर बद्र
किसी ने चूम के आँखों को ये दुआ दी थी
बशीर बद्र