Couplets Poetry (page 505)
सभी ताबीर उस की लिख रहे हैं
अरशद लतीफ़
फैलती जा रही है ये दुनिया
अरशद लतीफ़
कोई तो मोजज़ा ऐसा भी हो अपनी मोहब्बत में
अरशद लतीफ़
किस के सवाल पर ये दिल रोता है सारी सारी रात
अरशद लतीफ़
ख़ला का मसअला ही मुख़्तलिफ़ है
अरशद लतीफ़
जब मैं उस आदमी से दूर हुआ
अरशद लतीफ़
अजब कशिश है तिरे होने या न होने में
अरशद लतीफ़
ये माना सैल-ए-अश्क-ए-ग़म नहीं कुछ कम मगर 'अरशद'
अरशद कमाल
वो ज़माने का तग़य्युर हो कि मौसम का मिज़ाज
अरशद कमाल
वो आए तो लगा ग़म का मुदावा हो गया है
अरशद कमाल
मुझ को तलाश करते हो औरों के दरमियाँ
अरशद कमाल
ख़ाक-ए-सहरा तो बहुत दूर है ऐ वहशत-ए-दिल
अरशद कमाल
कभी उन का नहीं आना ख़बर के ज़ैल में था
अरशद कमाल
बिला-सबब तो कोई बर्ग भी नहीं हिलता
अरशद कमाल
जाने शब को क्या सूझी थी रिंदों को समझाने आए
अरशद काकवी
ज़िंदगी तू भी हमें वैसे ही इक रोज़ गुज़ार
अरशद जमाल 'सारिम'
ज़िंदगी हम से तिरी आँख-मिचोली कब तक
अरशद जमाल 'सारिम'
वो इक लम्हा सज़ा काटी गई थी जिस की ख़ातिर
अरशद जमाल 'सारिम'
सुपुर्द-ए-आब यूँ ही तो नहीं करता हूँ ख़ाक अपनी
अरशद जमाल 'सारिम'
रक़म करूँ भी तो कैसे मैं दास्तान-ए-वफ़ा
अरशद जमाल 'सारिम'
न जाने उस ने खुले आसमाँ में क्या देखा
अरशद जमाल 'सारिम'
क्या कहूँ कितना फ़ुज़ूँ है तेरे दीवाने का दुख
अरशद जमाल 'सारिम'
किस की तनवीर से जल उठ्ठे बसीरत के चराग़
अरशद जमाल 'सारिम'
ख़त्म होता ही नहीं सिलसिला तन्हाई का
अरशद जमाल 'सारिम'
जाने किस रुत में खिलेंगे यहाँ ताबीर के फूल
अरशद जमाल 'सारिम'
इसी बाइस मैं अपना निस्फ़ रखता हूँ अँधेरे में
अरशद जमाल 'सारिम'
हर एक शाख़ पे वीरानियाँ मुसल्लत हैं
अरशद जमाल 'सारिम'
देख ऐ मेरी ज़बूँ-हाली पे हँसने वाले
अरशद जमाल 'सारिम'
बस इतना रब्त काफ़ी है मुझे ऐ भूलने वाले
अरशद जमाल 'सारिम'
ऐसी ही बे-चेहरगी छाई हुई है शहर में
अरशद जमाल 'सारिम'