Couplets Poetry (page 504)
देखें महशर में उन से क्या ठहरे
आरज़ू लखनवी
दफ़अतन तर्क-ए-तअल्लुक़ में भी रुस्वाई है
आरज़ू लखनवी
चटकी जो कली कोयल कूकी उल्फ़त की कहानी ख़त्म हुई
आरज़ू लखनवी
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
आरज़ू लखनवी
भोली बातों पे तेरी दिल को यक़ीं
आरज़ू लखनवी
भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
आरज़ू लखनवी
बरसों भटका किया और फिर भी न उन तक पहुँचा
आरज़ू लखनवी
अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ भी थी परवाना भी
आरज़ू लखनवी
अपनी अपनी गर्दिश-ए-रफ़्तार पूरी कर तो लें
आरज़ू लखनवी
अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
आरज़ू लखनवी
'आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी
आरज़ू लखनवी
आप अपने से बरहमी कैसी
आरज़ू लखनवी
हमारी महफ़िलों में बे-हिजाब आने से क्या होगा
अर्शी रामपुरी
निगाह-ए-नाज़ की मासूमियत अरे तौबा
अर्शी भोपाली
मौक़ूफ़ फ़स्ल-ए-गुल पे नहीं रौनक़-ए-चमन
अर्शी भोपाली
हम तो आवारा-ए-सहरा हैं हमें क्या मतलब
अर्शी भोपाली
हमें तो अपनी तबाही की दाद भी न मिली
अर्शी भोपाली
बहुत अज़ीज़ न क्यूँ हो कि दर्द है तेरा
अर्शी भोपाली
अजीब चीज़ है ये शौक़-ए-आरज़ू-मंदी
अर्शी भोपाली
हो इंतिज़ार किसी का मगर मिरी नज़रें
अरशद सिद्दीक़ी
हमें मिट के भी ये हसरत कि भटकते उस गली में
अरशद सिद्दीक़ी
फ़ज़ा है तीरा ओ तारीक और उस का ख़याल
अरशद सिद्दीक़ी
शाम ढलते ही दिल के आँगन से
अरशद नईम
मैं वुसअतों से बिछड़ के तन्हा न जी सकूँगा
अरशद नईम
यही 'अरशद' हमारे नौ-जवानों की कहानी है
अरशद मीर
ग़ुरूब-ए-शाम तो दिन भर के फ़ासले पर है
अरशद मलिक
तलाश-ए-ला-मकाँ में उड़ रहा हूँ
अरशद महमूद नाशाद
मैं तिरे शहर से गुज़रा हूँ बगूले की तरह
अरशद महमूद नाशाद
हिसार-ए-ग़ैर में रहता है ये मकान-ए-वजूद
अरशद महमूद नाशाद
अपना क्या है कि रहे या न रहे
अरशद महमूद नाशाद