Couplets Poetry (page 589)

खिला रहेगा किसी याद के जज़ीरे पर

आफ़ताब हुसैन

करता कुछ और है वो दिखाता कुछ और है

आफ़ताब हुसैन

कब तक साथ निभाता आख़िर

आफ़ताब हुसैन

कब भटक जाए 'आफ़्ताब' हुसैन

आफ़ताब हुसैन

जो कुछ निगाह में है हक़ीक़त में वो नहीं

आफ़ताब हुसैन

हुस्न वालों में कोई ऐसा हो

आफ़ताब हुसैन

हर एक गाम उलझता हूँ अपने आप से मैं

आफ़ताब हुसैन

हाल हमारा पूछने वाले

आफ़ताब हुसैन

गए ज़मानों की दर्द कजलाई भूली बिसरी किताब पढ़ कर

आफ़ताब हुसैन

गए मंज़रों से ये क्या उड़ा है निगाह में

आफ़ताब हुसैन

फ़िराक़ मौसम की चिलमनों से विसाल लम्हे चमक उठेंगे

आफ़ताब हुसैन

एक मंज़र है कि आँखों से सरकता ही नहीं

आफ़ताब हुसैन

दुनिया से अलैहदगी का रास्ता

आफ़ताब हुसैन

दिलों के बाब में क्या दख़्ल 'आफ़्ताब-हुसैन'

आफ़ताब हुसैन

दिल-ए-मुज़्तर वफ़ा के बाब में ये जल्द-बाज़ी क्या

आफ़ताब हुसैन

चलो कहीं पे तअल्लुक़ की कोई शक्ल तो हो

आफ़ताब हुसैन

बदल रहे हैं ज़माने के रंग क्या क्या देख

आफ़ताब हुसैन

अज़ाब-ए-बर्क़-ओ-बाराँ था अँधेरी रात थी

आफ़ताब हुसैन

असास-ए-जिस्म उठाऊँ नए सिरे से मगर

आफ़ताब हुसैन

अपने ही दम से चराग़ाँ है वगरना 'आफ़्ताब'

आफ़ताब हुसैन

अभी है हुस्न में हुस्न-ए-नज़र की कार-फ़रमाई

आफ़ताब हुसैन

अभी दिलों की तनाबों में सख़्तियाँ हैं बहुत

आफ़ताब हुसैन

तारों का गो शुमार में आना मुहाल है

अफ़सर मेरठी

सुख में होता है हाफ़िज़ा बेकार

अफ़सर मेरठी

मुझे फ़र्दा की फ़िक्र क्यूँ-कर हो

अफ़सर मेरठी

जब सफ़र 'अफ़सर' कभी करते नहीं

अफ़सर मेरठी

है तेरे लिए सारा जहाँ हुस्न से ख़ाली

अफ़सर मेरठी

हाए वो जिस की उम्मीदें हों ख़िज़ाँ पर मौक़ूफ़

अफ़सर मेरठी

न जाने इस क़दर क्यूँ आप दीवाने से डरते हैं

अफ़सर माहपुरी

आ मेरे पास और कभी इस तरह चमक

अफ़सर जमशेद