Couplets Poetry (page 587)

किस प्यास से ख़ाली हुआ मश्कीज़ा हमारा

अफ़ज़ल गौहर राव

कौन सी ऐसी कमी मेरे ख़द-ओ-ख़ाल में है

अफ़ज़ल गौहर राव

हिज्र में इतना ख़सारा तो नहीं हो सकता

अफ़ज़ल गौहर राव

गुमराह कब किया है किसी राह ने मुझे

अफ़ज़ल गौहर राव

एक ही दाएरे में क़ैद हैं हम लोग यहाँ

अफ़ज़ल गौहर राव

चंद लोगों की मोहब्बत भी ग़नीमत है मियाँ

अफ़ज़ल गौहर राव

अपने बदन से लिपटा हुआ आदमी था मैं

अफ़ज़ल गौहर राव

यही बहुत थे मुझे नान ओ आब ओ शम्अ ओ गुल

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

उसे अजब था ग़ुरूर-ए-शगुफ़्त-ए-रुख़्सारी

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

मैं दिल को उस की तग़ाफ़ुल-सरा से ले आया

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

मैं चाहता हूँ मुझे मशअलों के साथ जला

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

किताब-ए-उम्र से सब हर्फ़ उड़ गए मेरे

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

किताब-ए-ख़ाक पढ़ी ज़लज़ले की रात उस ने

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कमान-ए-शाख़ से गुल किस हदफ़ को जाते हैं

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कमान-ए-ख़ाना-ए-अफ़्लाक के मुक़ाबिल भी

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

इस दिल को किसी दस्त-ए-अदा-संज में रखना

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

अता उसी की है ये शहद ओ शोर की तौफ़ीक़

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

रंग आ जाते मुट्ठी में जुगनू बन कर

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

मुश्किल था बहुत मेरे लिए तर्क-ए-तअल्लुक़

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

किसी ने मुझ से कह दिया था ज़िंदगी पे ग़ौर कर

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

जिस को मेरी हालत का एहसास नहीं

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

इस तरह सताया है परेशान किया है

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

दीवारों में दर होता तो अच्छा था

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

ऐ मेरे मुसव्विर नहीं ये मैं तो नहीं हूँ

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

तूफ़ान की ज़द में थे ख़यालों के सफ़ीने

आफ़ताब शम्सी

सभी हैं अपने मगर अजनबी से लगते हैं

आफ़ताब शम्सी

राह तकते जिस्म की मज्लिस में सदियाँ हो गईं

आफ़ताब शम्सी

नाम अपना ही मैं सब से खड़ा पूछ रहा था

आफ़ताब शम्सी

मैं जंगलों में दरिंदों के साथ रहता रहा

आफ़ताब शम्सी

जो साथ लाए थे घर से वो खो गया है कहीं

आफ़ताब शम्सी