Couplets Poetry (page 585)
इश्क़-बाज़ों की कहीं दुनिया में शुनवाई नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़ हो जाएगा मेरी दास्तान-ए-इश्क़ से
आग़ा हज्जू शरफ़
हमेशा शेफ़्ता रखती है अपने हुस्न-ए-क़ुदरत का
आग़ा हज्जू शरफ़
घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई
आग़ा हज्जू शरफ़
दुनिया जो न मैं चंद नफ़स के लिए लेता
आग़ा हज्जू शरफ़
दुखा देते हो तुम दिल को तो बढ़ जाता है दिल मेरा
आग़ा हज्जू शरफ़
दो वक़्त निकलने लगी लैला की सवारी
आग़ा हज्जू शरफ़
दिल में आमद आमद उस पर्दा-नशीं की जब सुनी
आग़ा हज्जू शरफ़
देखने भी जो वो जाते हैं किसी घायल को
आग़ा हज्जू शरफ़
बे-वफ़ा तुम बा-वफ़ा मैं देखिए होता है क्या
आग़ा हज्जू शरफ़
आमद आमद है तिरे शहर में किस वहशी की
आग़ा हज्जू शरफ़
रख लिए रौज़न-ए-ज़िंदाँ पे परिंदे सारे
अफ़ज़ाल नवेद
ऐसे कुछ दिन भी थे जो हम से गुज़ारे न गए
अफ़ज़ाल नवेद
ज़िंदगी इतनी परेशाँ है ये सोचा भी न था
अफ़ज़ल मिनहास
ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तो
अफ़ज़ल मिनहास
एक ही फ़नकार के शहकार हैं दुनिया के लोग
अफ़ज़ल मिनहास
चाँद में कैसे नज़र आए तिरी सूरत मुझे
अफ़ज़ल मिनहास
अपनी बुलंदियों से गिरूँ भी तो किस तरह
अफ़ज़ल मिनहास
ज़रा ये दूसरा मिस्रा दुरुस्त फ़रमाएँ
अफ़ज़ल ख़ान
ये नुक्ता इक क़िस्सा-गो ने मुझ को समझाया
अफ़ज़ल ख़ान
ये मोहब्बत के महल ता'मीर करना छोड़ दे
अफ़ज़ल ख़ान
ये कह दिया है मिरे आँसुओं ने तंग आ कर
अफ़ज़ल ख़ान
ये जो कुछ लोग ख़यालों में रहा करते हैं
अफ़ज़ल ख़ान
ये भी ख़ुद को हौसला देने का हीला है कि मैं
अफ़ज़ल ख़ान
तू रोज़ जिस के तजस्सुस में आ रहा है यहाँ
अफ़ज़ल ख़ान
तू मुझे तंग न कर ए दिल-ए-आवारा-मिज़ाज
अफ़ज़ल ख़ान
तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहीं
अफ़ज़ल ख़ान
तिरी मसनद पे कोई और नहीं आ सकता
अफ़ज़ल ख़ान
तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे
अफ़ज़ल ख़ान
तभी तो मैं मोहब्बत का हवालाती नहीं होता
अफ़ज़ल ख़ान