Couplets Poetry (page 584)

कलेजे में हज़ारों दाग़ दिल में हसरतें लाखों

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

इस लिए कहते थे देखा मुँह लगाने का मज़ा

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

हमीं हैं मौजिब-ए-बाब-ए-फ़साहत हज़रत-ए-'शाइर'

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

इक बात कहें तुम से ख़फ़ा तो नहीं होगे

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

बड़े सीधे-साधे बड़े भोले-भाले

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

अबरू न सँवारा करो कट जाएगी उँगली

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

दुनिया के जो मज़े हैं हरगिज़ वो कम न होंगे

आग़ा मोहम्मद तक़ी

ये खुले खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे

आग़ा हश्र काश्मीरी

याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं

आग़ा हश्र काश्मीरी

सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझ को माँग कर

आग़ा हश्र काश्मीरी

निकहत-ए-साग़र-ए-गुल बन के उड़ा जाता हूँ

आग़ा हश्र काश्मीरी

हश्र में इंसाफ़ होगा बस यही सुनते रहो

आग़ा हश्र काश्मीरी

गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है

आग़ा हश्र काश्मीरी

गो हवा-ए-गुलसिताँ ने मिरे दिल की लाज रख ली

आग़ा हश्र काश्मीरी

गो हरम के रास्ते से वो पहुँच गए ख़ुदा तक

आग़ा हश्र काश्मीरी

एक धुँदला सा तसव्वुर है कि दिल भी था यहाँ

आग़ा हश्र काश्मीरी

तू नहीं मिलती तो हम भी तुझ को मिलने के नहीं

आग़ा हज्जू शरफ़

तेज़ कब तक होगी कब तक बाढ़ रक्खी जाएगी

आग़ा हज्जू शरफ़

शाख़-ए-गुल झूम के गुलज़ार में सीधी जो हुई

आग़ा हज्जू शरफ़

क़रीब-ए-मर्ग हूँ लिल्लाह आईना रख दो

आग़ा हज्जू शरफ़

नहीं करते वो बातें आलम-ए-रूया में भी हम से

आग़ा हज्जू शरफ़

मूजिद जो नूर का है वो मेरा चराग़ है

आग़ा हज्जू शरफ़

लिक्खा है जो तक़दीर में होगा वही ऐ दिल

आग़ा हज्जू शरफ़

क्या ख़ुदा हैं जो बुलाएँ तो वो आ ही न सकें

आग़ा हज्जू शरफ़

क्या बुझाएगा मिरे दिल की लगी वो शोला-रू

आग़ा हज्जू शरफ़

ख़ल्वत-सरा-ए-यार में पहुँचेगा क्या कोई

आग़ा हज्जू शरफ़

कहा जो मैं ने मेरे दिल की इक तस्वीर खिंचवा दो

आग़ा हज्जू शरफ़

कभी जो यार को देखा तो ख़्वाब में देखा

आग़ा हज्जू शरफ़

जोखम ऐ मर्दुम-ए-दीदा है समझ के रोना

आग़ा हज्जू शरफ़

जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था

आग़ा हज्जू शरफ़