Couplets Poetry (page 582)

ज़िंदगी ख़्वाब है और ख़्वाब भी ऐसा कि मियाँ

अहमद अता

ये तिरा हिज्र अता दर्द अता कर्ब अता

अहमद अता

ये जो रातों को मुझे ख़्वाब नहीं आते 'अता'

अहमद अता

ये चादर एक अलामत बनी हुई थी यहाँ

अहमद अता

वैसा ही ख़राब शख़्स हूँ मैं

अहमद अता

उस का बदन है राग सा राग भी एक आग सा

अहमद अता

ताबीर बताई जा चुकी है

अहमद अता

सड़क पे बैठ गए देखते हुए दुनिया

अहमद अता

फिर कोई दूर हुआ जाता है

अहमद अता

ना-रसाई ने अजब तौर सिखाए हैं 'अता'

अहमद अता

मैं उस की आँखों के बारे में कुछ नहीं कहता

अहमद अता

मैं तो मिट्टी हो रहा था इश्क़ में लेकिन 'अता'

अहमद अता

मैं तेरी रूह में उतरा हुआ मिलूँगा तुझे

अहमद अता

लोग हँसते हैं हमें देख के तन्हा तन्हा

अहमद अता

क्या हुए लोग पुराने जिन्हें देखा भी नहीं

अहमद अता

कोई गुमाँ हूँ कोई यक़ीं हूँ कि मैं नहीं हूँ

अहमद अता

कोई ऐसा तो तिरे ब'अद नहीं रहना था

अहमद अता

किसी को ख़्वाब में अक्सर पुकारते हैं हम

अहमद अता

किसी बुज़ुर्ग के बोसे की इक निशानी है

अहमद अता

हम ने अव्वल तो कभी उस को पुकारा ही नहीं

अहमद अता

हम बहकते हुए आते हैं तिरे दरवाज़े

अहमद अता

हम आस्तान-ए-ख़ुदा-ए-सुख़न पे बैठे थे

अहमद अता

हम आज हँसते हुए कुछ अलग दिखाई दिए

अहमद अता

हँसते हँसते हो गया बर्बाद मैं

अहमद अता

हमारी उम्र से बढ़ कर ये बोझ डाला गया

अहमद अता

बाग़-ए-हवस में कुछ नहीं दिल है तो ख़ुशनुमा है दिल

अहमद अता

अब यहाँ कौन निकालेगा भला दूध की नहर

अहमद अता

आज देखा है उसे ऐसी मोहब्बत से 'अता'

अहमद अता

ये अलग बात कि तज्दीद-ए-तअल्लुक़ न हुआ

अहमद अशफ़ाक़

तर्क-ए-उल्फ़त के ब'अद भी 'अश्फ़ाक़'

अहमद अशफ़ाक़