Couplets Poetry (page 580)

गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा

अहमद फ़राज़

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो

अहमद फ़राज़

फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ

अहमद फ़राज़

'फ़राज़' तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया

अहमद फ़राज़

'फ़राज़' तेरे जुनूँ का ख़याल है वर्ना

अहमद फ़राज़

'फ़राज़' तर्क-ए-तअल्लुक़ तो ख़ैर क्या होगा

अहमद फ़राज़

'फ़राज़' इश्क़ की दुनिया तो ख़ूब-सूरत थी

अहमद फ़राज़

इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है

अहमद फ़राज़

इक तो हम को अदब आदाब ने प्यासा रक्खा

अहमद फ़राज़

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

अहमद फ़राज़

दो घड़ी उस से रहो दूर तो यूँ लगता है

अहमद फ़राज़

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

अहमद फ़राज़

दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है

अहमद फ़राज़

दिल का दुख जाना तो दिल का मसअला है पर हमें

अहमद फ़राज़

दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है

अहमद फ़राज़

ढूँड उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती

अहमद फ़राज़

देखो ये किसी और की आँखें हैं कि मेरी

अहमद फ़राज़

देखा मुझे तो तर्क-ए-तअल्लुक़ के बावजूद

अहमद फ़राज़

चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'

अहमद फ़राज़

चले थे यार बड़े ज़ोम में हवा की तरह

अहमद फ़राज़

चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का

अहमद फ़राज़

भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब

अहमद फ़राज़

ब-ज़ाहिर एक ही शब है फ़िराक़-ए-यार मगर

अहमद फ़राज़

बंदगी हम ने छोड़ दी है 'फ़राज़'

अहमद फ़राज़

बहुत दिनों से नहीं है कुछ उस की ख़ैर ख़बर

अहमद फ़राज़

और 'फ़राज़' चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे

अहमद फ़राज़

ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'

अहमद फ़राज़

ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते

अहमद फ़राज़

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है

अहमद फ़राज़

अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर

अहमद फ़राज़