Couplets Poetry (page 602)

वो आग लगी पान चबाए से कसू की

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

उस लब-ए-बाम से ऐ सरसर-ए-फुर्क़त तू बता

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

उल्फ़त में तेरा रोना 'एहसाँ' बहुत बजा है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

तो भी उस तक है रसाई मुझे एहसाँ दुश्वार

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

तिरी आन पे ग़श हूँ हर आन ज़ालिम

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

तनख़्वाह एक बोसा है तिस पर ये हुज्जतें

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

शब पिए वो सराब निकला है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

पलकों से गिरे है अश्क टप टप

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नसीब उस के शराब-ए-बहिश्त होवे मुदाम

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नमाज़ अपनी अगरचे कभी क़ज़ा न हुई

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

न पाया गाह क़ाबू आह में ने हाथ जब डाला

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

मोहतसिब भी पी के मय लोटे है मयख़ाने में आज

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

मिरी बात-चीत उस से 'एहसाँ' कहाँ है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

मज़े की बात तो ये है कि बे-मज़ा है वो दिल

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

मय-कदे में इश्क़ के कुछ सरसरी जाना नहीं

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

क्यूँकर न मय पियूँ मैं क़ुरआँ को देख ज़ाहिद

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

क्यूँ तू रोता है दिला आने दे रोज़-ए-वस्ल को

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

क्यूँ न रुक रुक के आए दम मेरा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

कुछ तुम्हें तर्स-ए-ख़ुदा भी है ख़ुदा की वास्ते

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

किस को उस का ग़म हो जिस दम ग़म से वो ज़ारी करे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

ख़ाक आब-ए-गिर्या से आतिश बुझे नाचार हम

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

कौन सानी शहर में इस मेरे मह-पारे की है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

जो पूछा मैं ने दिल ज़ुल्फ़ों में जूड़े में कहाँ बाँधा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

जाँ-कनी पेशा हो जिस का वो लहक है तेरा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

इतवार को आना तिरा मालूम कि इक उम्र

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

ग़ुंचा को मैं ने चूमा लाया दहन को आगे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गरेबाँ चाक है हाथों में ज़ालिम तेरा दामाँ है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गर है दुनिया की तलब ज़ाहिद-ए-मक्कार से मिल

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी