Couplets Poetry (page 604)
सच तो ये है कि नदामत ही हुई
अब्दुल मजीद हैरत
ज़िंदगी ज़ोर है रवानी का
अब्दुल हमीद अदम
ज़िंदगी है इक किराए की ख़ुशी
अब्दुल हमीद अदम
ज़रा इक तबस्सुम की तकलीफ़ करना
अब्दुल हमीद अदम
ज़बान-ए-होश से ये कुफ़्र सरज़द हो नहीं सकता
अब्दुल हमीद अदम
ये रोज़-मर्रा के कुछ वाक़िआत-ए-शादी-ओ-ग़म
अब्दुल हमीद अदम
ये क्या कि तुम ने जफ़ा से भी हाथ खींच लिया
अब्दुल हमीद अदम
या दुपट्टा न लीजिए सर पर
अब्दुल हमीद अदम
वो मिले भी तो इक झिझक सी रही
अब्दुल हमीद अदम
वो अहद-ए-जवानी वो ख़राबात का आलम
अब्दुल हमीद अदम
वही शय मक़सद-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र महसूस होती है
अब्दुल हमीद अदम
तुझ को क्या दूसरों के ऐबों से
अब्दुल हमीद अदम
थोड़ी सी अक़्ल लाए थे हम भी मगर 'अदम'
अब्दुल हमीद अदम
तौबा का तकल्लुफ़ कौन करे हालात की निय्यत ठीक नहीं
अब्दुल हमीद अदम
तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया
अब्दुल हमीद अदम
तख़लीक़-ए-काएनात के दिलचस्प जुर्म पर
अब्दुल हमीद अदम
तड़प कर मैं ने तौबा तोड़ डाली
अब्दुल हमीद अदम
तबाह हो के हक़ाएक़ के खुरदुरे-पन से
अब्दुल हमीद अदम
सो भी जा ऐ दिल-ए-मजरूह बहुत रात गई
अब्दुल हमीद अदम
सिर्फ़ इक क़दम उठा था ग़लत राह-ए-शौक़ में
अब्दुल हमीद अदम
सिर्फ़ इक क़दम उठा था ग़लत राह-ए-शौक़ में
अब्दुल हमीद अदम
शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए
अब्दुल हमीद अदम
शायद मुझे निकाल के पछता रहे हों आप
अब्दुल हमीद अदम
शौक़िया कोई नहीं होता ग़लत
अब्दुल हमीद अदम
सवाल कर के मैं ख़ुद ही बहुत पशेमाँ हूँ
अब्दुल हमीद अदम
साक़ी ज़रा निगाह मिला कर तो देखना
अब्दुल हमीद अदम
साक़ी तुझे इक थोड़ी सी तकलीफ़ तो होगी
अब्दुल हमीद अदम
साक़ी मुझे शराब की तोहमत नहीं पसंद
अब्दुल हमीद अदम
सब को पहुँचा के उन की मंज़िल पर
अब्दुल हमीद अदम
पीर-ए-मुग़ाँ से हम को कोई बैर तो नहीं
अब्दुल हमीद अदम